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कांट्रेक्ट के फेर में फंसा मातृत्व अवकाश
ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:57 PM IST
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आउटसोर्सिंग और संविदा पर तैनात महिला कर्मियों का मातृत्व अवकाश कांट्रेस्ट के फेर में फंस गया है। महिला कर्मियों को अवकाश दिए जाने में कई पेंच हैं। इसके लिए शासन स्तर पर माथापच्ची जारी है। सरकार महिला कर्मचारियों को लाभ देना चाहती है, एक साल से कम के अनुबंध वाली महिलाओं को छुट्टी का लाभ कैसे दिया जाए इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने सोमवार को न्याय, वित्त, कार्मिक आदि विभागों की हुई बैठक में अवकाश दिए जाने के विधिक प्रावधानों पर विचार विमर्श किया।
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आउटसोर्सिंग से सरकारी विभागों में तैनात महिला कर्मचारियों के सेवाओं का अधिकतम एक वर्ष का करार होता है, जबकि कम अवधि का भी करार किया जाता है। ऐसे में छह माह का मातृत्व अवकाश दिए जाने का प्रावधान निर्धारित करना आसान नहीं है। अगर महिला कर्मी अनुबंध के समापन के समय अवकाश लेती हैं तो उसका अनुबंध विस्तारित करना अनिवार्य हो जाएगा। इससे महकमों पर अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा।
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छह माह के कांट्रेक्ट में अवकाश देने में अधिक समस्याएं आएंगी, जिस पर न्याय विभाग ने अपनी राय और विधिक प्रावधान प्रस्तुत किए इससे उपनल, पीआरडी की आउटसोर्सिंग पर तैनात महिलाओं के अलावा संविदा पर तैनात को लाभ मिलेगा, जिसे लेकर सरकार अपनी मंशा पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। शासन अब तमाम प्रावधानों का विधिक परीक्षण कर प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष लेकर आएगा।
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