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हैरतअंगेजः मौत के बाद भी रोज ड्यूटी करता है यह शहीद

Mon, 13 Apr 2015 03:40 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 13 Apr 2015 03:40 PM IST
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martyr do his duty after death.

वर्ष 1962 के युद्ध में अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन की सेना को जसवंत सिंह रावत ने अकेले 72 घंटे तक रोके रखा था। जैसे ही चीन की सेना को पता लगा कि दूसरी ओर सिर्फ एक सैनिक है तो उन्होंने घेरा बनाकर धोखे से जसवंत सिंह को मार दिया और उनका सिर धड़ से अलग कर साथ ले गए।

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जसवंत सिंह साढ़े इक्कीस साल की उम्र में शहीद हो गए थे। उनकी बहादुरी की सेना इस कदर कायल है कि मरणोपरांत भी उन्हें प्रमोशन मिलते गए। उनके नाम का काफी बड़ा मंदिर अरुणाचल में है।
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माना जाता है कि आज भी जसवंत सिंह रोज आते हैं। रोज उनके लिए नाश्ता, खाना जाता है, रोज उनकी वर्दी धोई जाती है, जूतों में पॉलिश की जाती है और नई चादर बिछाई जाती है। लोगों का कहना है कि शहीद जसवंत अब भी सीमा पर ड्यूटी करते हैं।
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महावीर चक्र विजेता शहीद जसवंत सिंह रावत की 93 वर्षीय मां लीला देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेटे के लिए परमवीर चक्र की मांग की है।

लीला देवी ने बीते दिसंबर माह में प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था। पत्र का जवाब नहीं मिलने से वह निराश हैं। उनका कहना है कि वह अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगी। लीला देवी के बेटे विजय सिंह रावत ने बताया कि भाई के लिए परिवार मिलकर संघर्ष करेगा।

जब तक मां जीवित हैं, वह चाहती हैं कि उनकी आंखों के सामने शहीद जसवंत सिंह को परमवीर चक्र मिल जाए। इसके लिए हमने अपनी ओर से प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। अब तक जवाब नहीं आने से हम निराश जरूर हैं, लेकिन हम बार-बार अपनी मांग दोहराएंगे। हमारे भाई ने देश के लिए जान दी है। सरकार को चाहिए कि वह शहीद को परमवीर चक्र दे।

दुनिया जानेगी शहीद जसवंत सिंह की वीरता

martyr do his duty after death.

वर्ष 1962 के युद्ध में भारतीय सेना के एक जांबाज ने अकेले 72 घंटे तक चीन की सेना को अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर कैसे रोके रखा, इसे अब पूरी दुनिया देखेगी। दो साल के शोध के बाद दून के कलाकार महावीर चक्र विजेता शहीद जसवंत सिंह रावत पर फिल्म बनाने जा रहे हैं।

15 जून से शूटिंग शुरू होगी। हालांकि कुछ और कलाकारों को शामिल करने के लिए दो दिन बाद दून में ऑडिशन होंगे। 12 करोड़ रुपये से बनने वाली फिल्म में काम करने के लिए तकनीकी टीम मुंबई से आएगी। रविवार को शहीद जसवंत सिंह रावत के निवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में फिल्म के निर्देशक अविनाश ध्यानी ने बताया कि दो साल तक जसवंत सिंह पर शोध करने के बाद कहानी फाइनल की गई है।

शोध की शुरूआत जसवंत सिंह के घर से की गई। उनके गांव पौड़ी, गढ़ी कैंट स्थित उनके स्कूल और अरुणाचल स्थित मंदिर में भी गए। जितना पता था, उससे कई गुना ज्यादा उनके बारे में सुनने को मिला।

अरुणाचल में सैनिकों को जब पता लगा कि हम शहीद जसवंत पर फिल्म बनाने की तैयारी में हैं, तो बहुत खुश हुए। करीब दो महीने पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी मिले हैं।

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