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रावत को देखने परेड ग्राउंड में उमड़ा हुजूम

Sun, 02 Feb 2014 12:00 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Feb 2014 12:00 PM IST
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many people reached to see harish rawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने वाले हरीश रावत की झलक पाने के लिए परेड ग्राउंड में हजारों समर्थक उमड़ पड़े।

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सभी जिलों से समर्थक जुटे
कुमाऊं, गढ़वाल और मैदानी जिलों से 700 से अधिक छोटे-बड़े वाहन दून आए। शनिवार सुबह से ही परेड ग्राउंड में रावत समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। कुमाऊं के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ से तो लोग शुक्रवार शाम ही दून के लिए निकल गए थे।

सुबह सभी जिलों से समर्थक ग्राउंड में जुटने लगे। दोपहर 12 बजे कुमाऊं से एक साथ 31 बसें यहां पहुंचीं। इस बीच यहां पंडाल लगाने का काम भी शुरू हो गया था। दोपहर तीन बजे तक गढ़वाल, हरिद्वार, जौनसार-बावर से 150 से अधिक बसें यहां आ गई थीं।
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दूसरी ओर, 500 से अधिक निजी वाहनों से भी समर्थक यहां आए। दिनभर लोग रणसिंगा, मसकबीन, ढोल-दमाऊ की थाप पर थिरकते रहे। सबको इंतजार था हरीश रावत का। अल्मोड़ा से आए हरीश सिंह क्योरा ने बताया वह सुबह ही आ गए थे।
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उत्तरकाशी के रतन कैंतुरा ने बताया कि उनके जिले से कई बसें पहुंची हैं। हरिद्वार से आए जगदीश का कहना था कि पहली बार एक मैदान में गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और मैदानी संस्कृति की झलक दिख रही है।

जाम ने बढ़ाई दिक्कत
रावत समर्थकों के हुजूम से राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतर गई। दोपहर एक बजे से परेड ग्राउंड, लैंसडौन चौक, कनक चौक पर जाम लगना शुरू हुआ जो शाम पांच बजे तक घंटाघर, दर्शनलाल, राजपुर रोड, एस्ले हाल चौक तक पहुंच गया। अतिरिक्त पुलिस बल को सड़कों पर उतारने के बाद कड़ी मशक्कत से देर शाम रास्ते खुलवाए गए।

शुभ मानि जा निशान, हरदा कदम शुभ हो...
‘यो निशान बहुते शुभ मानि जां, हरदा मुख्यमंत्री बणि ग्यो। उनर पैली कदम शुभ हो, तबै लि भे आयां...।’ (ये निशान बहुत शुभ माना जाता है। हमारे हरीश दा मुख्यमंत्री बन गए हैं।

उनका पहला कदम शुभ हो, इसके लिए यह निशान लाए हैं।) कुमाऊं के ग्रामीण क्षेत्रों में बारातों, पूजा आयोजनों और पारंपरिक होली जुलूस के दौरान सबसे आगे और सबसे पीछे रखे जाने वाले झंडे (निशान) शनिवार को परेड ग्राउंड में नजर आए।

निशान लेकर आए बुजुर्गों ने सीएम के पद पर हरीश से प्रदेश की बेहतरी की उम्मीद जताते हुए उनके उज्ज्वल राजनीतिक जीवन की कामना की।

शनिवार को परेड ग्राउंड में लाल और सफेद रंग के झंडे लिए बुजुर्ग नजर आए। लाल झंडा थामे मौलेखाल से आए महेश चंद्र ने बताया कि इसे निशान कहा जाता है।

लाल निशान आगे चलता है
बारात जब निकलती है तो सफेद रंग का निशान बारात के सबसे आगे, जबकि लाल सबसे पीछे रहता है। दुल्हन लेकर लौटते वक्त लाल निशान सबसे आगे और सफेद सबसे पीछे हो जाता है। सफेद निशान लिए माधवानंद ने बताया कि निशान देखकर लोग दूर से ही अंदाजा लगा लेते हैं कि बारात आ रही है।


होली में लाल निशान आगे चलता है। निशान देखकर लोग स्वागत के लिए उमड़ पड़ते हैं। बताया कि इन निशानों को कभी जमीन पर नहीं रखा जाता। इसे थामने वाला व्यक्ति निशान को छोड़ नहीं सकता।

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