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Corbett Tiger Reserve: टाइगर सफारी निर्माण में फंस सकती है कई अफसरों की गर्दन, नोटिस जारी होने से मची खलबली 

Thu, 19 May 2022 02:30 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 19 May 2022 02:30 PM IST
सार

उत्तराखंड शासन को जारी नोटिस में सीजेडए ने साफ तौर पर कहा कि सफारी के अंतिम मास्टर ले-आउट प्लान को न तो केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमोदित कराया गया और न ही वहां बनने वाले बाघ बाड़ों के विशेष डिजाइन की अनुमति ली गई।  

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Corbett Tiger Reserve, many officers will be trapped If investigation into disturbances in construction of Tiger Safari
कॉर्बेट नेशनल पार्क - फोटो : अमरउजाला

विस्तार

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरो रेंज में टाइगर सफारी निर्माण में वन विभाग के कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। दो महीने पहले स्थलीय निरीक्षण कर चुकी केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की टीम की रिपोर्ट पर उत्तराखंड के मुख्य सचिव को नोटिस जारी हुआ तो खलबली मची।

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मुख्य सचिव के निर्देश पर विभाग ने तीन अफसरों को नोटिस देकर 15 दिनों में जवाब मांगा है लेकिन जांच शुरू नहीं की गई है। माना जा रहा है कि जांच मेें कई बड़े अफसर फंस सकते हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इस मामले को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 55(एए) के तहत संज्ञान में लिया। गुज्जर स्रोत, पाखरो ब्लॉक, सोनानदी रेंज, कालागढ़ डिवीजन, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी निर्माण में बरती गई अनियमितता के संबंध में नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि निर्माण में निर्धारित शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया।  

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उत्तराखंड शासन को जारी नोटिस में सीजेडए ने साफ तौर पर कहा कि सफारी के अंतिम मास्टर ले-आउट प्लान को न तो केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमोदित कराया गया और न ही वहां बनने वाले बाघ बाड़ों के विशेष डिजाइन की अनुमति ली गई।  इस पर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से तत्कालिन कॉर्बेट पार्क निदेशक राहुल, टाइगर सफारी निर्माण से जुड़े रहे तत्कालिन डीएफओ किशन चंद और अखिलेश तिवारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

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डिजाइन में थी खामियां

सीजेडए ने 27 अगस्त 2021 को उत्तराखंड वन विभाग से जवाब मांगा था। 13 सितंबर 2021 को कॉर्बेट के तत्कालिक निदेशक ने टाइगर सफारी में बाड़े के चित्र पेश किए। सीजेडए ने बाड़े के डिजाइन पर पुन: प्रस्ताव देने को कहा। इस पर निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने 24 जनवरी 2022 को पत्र भेजकर स्वीकारा था कि पहले प्रस्तुत किया गया डिजाइन  त्रुटिपूर्ण था।

अनुमति से पहले ही कर दिया था बाड़े का निर्माण 

सीजेडए की टीम ने 9-10 मार्च 2022 को स्थलीय निरीक्षण किया तो पाया कि वन्य जीवों के लिए बाड़ों का निर्माण सीजेडए के अनुमोदन के बिना किया गया। अधिकारियों के पास ले-आउट योजना की कोई प्रमाणित प्रति नहीं थी। टीम में पीसी त्यागी, पूर्व पीसीसीएफ और सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू (हॉफ), तमिलनाडु और सदस्य ईजीजेडडी, सीजेडए लक्ष्मीनरसिम्हा आर शामिल थे। 

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के नोटिस के बाद इस मामले में जिन अफसरों के ऊपर प्रबंधन और दूसरी जिम्मेदारियां थीं, उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रमुुख तौर पर तत्कालिन कॉर्बेट निदेशक और डीएफओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।  - डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक 

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सीईसी की बैठक में भी उठा मुद्दा

पाखरो टाइगर सफारी का मुद्दा बुधवार को नई दिल्ली में हुई सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) बैठक में भी उठा। बैठक के बिंदु तो अभी जारी नहीं किए गए हैं। बैठक में सचिव वन विजय यादव और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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