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नम आंखों से दी मनोरमा को आखिरी विदाई, उमड़ा दून

Thu, 19 Feb 2015 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 Feb 2015 09:58 PM IST
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manorama sharma last journey.

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद मनोरमा शर्मा डोबरियाल का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार दोपहर राजकीय सम्मान के साथ लक्खीबाग श्मशान घाट पर किया गया। मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत सभी दलों के नेता, गणमान्य लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

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बुधवार को सांसद मनोरमा शर्मा का गुड़गांव के आर्डिमिस अस्पताल में निधन हो गया था। बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए कांग्रेस भवन में रखा गया। अंतिम दर्शन के दौरान लोग फूट-फूटकर रो पड़े।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, मेयर विनोद चमोली, मंत्री दिनेश अग्रवाल, प्रीतम सिंह, विधायक गणेश जोशी, मुन्ना सिंह चौहान तथा अन्य गणमान्य लोग पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए पहुंचे। जनता दर्शन के बाद शवयात्रा शुरू हुई। मुख्यमंत्री रावत ने सबसे पहले कांधा दिया।
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महानगर कांग्रेस कार्यकर्ता ‘जब तक सूरज चांद रहेगा मनोरमा तेरा नाम रहेगा’ नारे लगाते रहे। शवयात्रा घंटाघर, पलटनबाजार, सहारनपुर चौक होती हुई लक्खीबाग श्मशान घाट पहुंची। यहां मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। फिर पुलिस के जवानों ने अंतिम सलामी दी। मुखाग्नि मनोरमा शर्मा के बड़े बेटे विवेक शर्मा ने दी।

आंखें बयां कर रही थीं मनोरमा को खोने का गम

manorama sharma last journey.

बेटियों के प्रति बेहद भावुक मनोरमा की अपनी कोई बेटी नहीं थी। तीन बेटे हैं, जो व्यवसाय से जुड़े हैं। सबसे बड़े 44 वर्षीय विवेक उर्फ विक्की, 40 साल के आलोक और इनसे दो साल छोटे मयंक। खुद के दो-दो बच्चे होने के बावजूद तीनों बेटों के लिए मां मनोरमा संबल थीं। वह छोटी-छोटी बातें उनसे साझा करते थे।

मनोरमा के पति 77 वर्षीय ब्रह्म शर्मा भी मनोरमा को याद करते नहीं अघाते। वह 1996 में ओएनजीसी से एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिजनों की मूक आंखें मनोरमा को खोने का गम बयां कर रही थीं।

उनके अजबपुर कलां स्थित आवास पर मित्रों, परिचितों का जमावड़ा लगा था। आलोक का केबल नेटवर्क का व्यवसाय है, जबकि मयंक कांट्रेक्टर है, लेकिन इन्होंने इस दौरान व्यवसाय की किसी भी बात से दूरी बरती। बातें केवल मनोरमा की, उनकी बीमारी की और उनकी मौत के इर्द-गिर्द सिमटी थीं। कई ऐसे लोग भी उनकी मौत की खबर सुन घर पहुंचे, जिनसे मनोरमा का कोई साबका नहीं था।

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