आदमखोर गुलदार को डंडों से पीटकर किया ढेर
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नानकमत्ता में आबादी में घुस आए गुलदार ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिससे तीन लोग और दो मवेशी घायल हो गए।
कहा जा रहा है कि गुस्साए ग्रामीणों ने गुलदार को घेर लिया और लाठी-डंडों से पीटकर ढेर कर दिया। घायलों को उपचार के लिए सितारगंज और खटीमा भेजा गया।
इस बीच मौके पर पहुंचे वनकर्मियों को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों की टीम ने गुलदार का पोस्टमार्टम किया।
खेत की रखवाली कर रहे सुरजीत को किया घायल
सोमवार की रात बिचई निवासी सुरजीत सिंह (55) पुत्र छारा सिंह अपने खेत की रखवाली कर रहा था।
रात 11 बजे गन्ने के खेत से निकले गुलदार ने उस पर हमला कर दिया, जिससे सुरजीत गंभीर रूप से घायल हो गया।
शोर मचाने पार आसपास खेतो में मौजूद लोग मौके पर पंहुचे तो गुलदार भाग गया। परिजनो ने घायल को सितारगंज
सीएचसी मे भर्ती कराया, जहां से उसे रेफर कर दिया गया।
उसके बाद गुलदार ने विचई निवासी अमर सिंह पुत्र हरवंश सिंह के घर में घुसकर दो भैंस और पालतु कुत्ते को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। परिजनों के शोर मचाने पर गुलदार मौके से नदारद हो गया।
गुस्साए ग्रामीणों ने गुलदार को किया अधमरा
मंगलवार की सुबह नौ बजे गुलदार ने साइकिल से नानकमत्ता जा रहे बेलखेड़ा निवासी करनैल सिंह पुत्र बूढ़ सिंह तथा उनके पुत्र गुरमीत सिंह पर हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए, उन्होंने गुलदार को घेर लिया। ग्रामीणों के पिटाई से गुलदार अधमरा होकर वहीं गिर पड़ा।
सूचना पर रंसाली रेंज के वन कर्मी मौके पर पंहुच गए, लेकिन तब तक गुलदार दम तोड़ चुका था।
इस बीच प्रभागीय वनाधिकारी आनंद आर्या, वन क्षेत्राधिकारी भगवत पंत, बाराकोली रेंज के क्षेत्राधिकारी बीके पांडे में दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गए।
घायलों को मुआवजा देने की मांग
टीम ने गुलदार के शव को कब्जे में ले लिया। इस बीच मौके पर जुटे ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को घेर लिया।
उन्होंने वन्य जीवों से सुरक्षा और घायलों को मुआवजा देने की मांग उठाई। वनाधिकारियों की सूचना पर नानकमत्ता थानाध्यक्ष ओमवीर रावत पुलिस बल लेकर मौके पर पंहुच गए।
उन्होंने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया। गुलदार के सभी अंग सुरक्षित थे। खटीमा व सितारगंज के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद पाठक, डा. पीएस ध्यानी के पैनल ने गुलदार का पोस्टमार्टम किया।
उसके बाद गुलदार का शव दफ ना दिया गया।