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Dehradun News: सौतेली बेटी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद
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देहरादून। 12 साल की सौतेली बेटी से कई बार दुष्कर्म करने के दोषी पिता को पॉक्सो कोर्ट ने 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को राज्य सरकार की योजना के तहत पांच लाख रुपये प्रतिकर दिलाने के निर्देश दिए हैं। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो)/अपर जिला जज कुमारी कुसुम शानी ने शुक्रवार को सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार, घटना सात अगस्त 2023 की है। शाम करीब साढ़े छह बजे पीड़िता की मां काम से घर लौटी तो उसने आरोपी को बेटी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। आरोपी ने शराब पी रखी थी। आरोप था कि उसने दोनों छोटे बच्चों को चाउमीन लाने के बहाने घर से बाहर भेज दिया था। मां के पूछने पर बच्ची ने बताया कि आरोपी पहले भी उसके साथ ऐसी हरकत कर चुका है और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता था। इसके बाद नौ अगस्त 2023 को देहरादून में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी को अगले दिन बदायूं स्थित उसके गांव से गिरफ्तार किया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मेडिकल जांच में शुक्राणु नहीं मिलने का तर्क देते हुए आरोपी को निर्दोष बताया। कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म के अपराध को साबित करने के लिए शुक्राणु मिलना अनिवार्य नहीं है। पीड़िता की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए कोर्ट ने कहा कि उसकी पुष्टि मां की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्य और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान से भी होती है।
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स्कूल के दाखिला रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि के अनुसार घटना के समय बच्ची की उम्र 12 साल तीन महीने थी। बचाव पक्ष उम्र को लेकर कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने पीड़िता की ओर से घर छोड़ने से पहले मां के नाम लिखे पत्र को भी साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण माना। आरोपी ने बच्ची को किसी लड़के से बात करने पर डांटने के कारण झूठा फंसाने का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को आधारहीन माना।
कोर्ट ने दोषी को 20 साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं, मारपीट के मामले में छह महीने की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।
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प्रतिबंधित दवाओं के तस्कर को 10 साल की सजा
- 2014 में शहर कोतवाली पुलिस ने किया था गिरफ्तार, एनडीपीएस कोर्ट ने लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना
देहरादून। प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी के 12 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पुलिस की ओर से मामले में प्रभावी पैरवी के बाद प्रथम विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
वर्ष 2014 में शहर कोतवाली पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सूरज पाल निवासी ग्राम लक्ष्मीपुर, सहसपुर को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 9720 प्रतिबंधित गोलियां और डायजेपाम प्रतिबंधित सिरप की एक शीशी बरामद हुई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर प्रथम विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट ने शुक्रवार को आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। उधर, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को मादक पदार्थों की तस्करी में गिरफ्तार आरोपियों के मामलों में अदालत के समक्ष प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए हैं।
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अभियोजन के अनुसार, घटना सात अगस्त 2023 की है। शाम करीब साढ़े छह बजे पीड़िता की मां काम से घर लौटी तो उसने आरोपी को बेटी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। आरोपी ने शराब पी रखी थी। आरोप था कि उसने दोनों छोटे बच्चों को चाउमीन लाने के बहाने घर से बाहर भेज दिया था। मां के पूछने पर बच्ची ने बताया कि आरोपी पहले भी उसके साथ ऐसी हरकत कर चुका है और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता था। इसके बाद नौ अगस्त 2023 को देहरादून में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी को अगले दिन बदायूं स्थित उसके गांव से गिरफ्तार किया था।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मेडिकल जांच में शुक्राणु नहीं मिलने का तर्क देते हुए आरोपी को निर्दोष बताया। कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म के अपराध को साबित करने के लिए शुक्राणु मिलना अनिवार्य नहीं है। पीड़िता की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए कोर्ट ने कहा कि उसकी पुष्टि मां की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्य और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान से भी होती है।
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स्कूल के दाखिला रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि के अनुसार घटना के समय बच्ची की उम्र 12 साल तीन महीने थी। बचाव पक्ष उम्र को लेकर कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने पीड़िता की ओर से घर छोड़ने से पहले मां के नाम लिखे पत्र को भी साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण माना। आरोपी ने बच्ची को किसी लड़के से बात करने पर डांटने के कारण झूठा फंसाने का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को आधारहीन माना।
कोर्ट ने दोषी को 20 साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं, मारपीट के मामले में छह महीने की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।
प्रतिबंधित दवाओं के तस्कर को 10 साल की सजा
- 2014 में शहर कोतवाली पुलिस ने किया था गिरफ्तार, एनडीपीएस कोर्ट ने लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना
देहरादून। प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी के 12 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पुलिस की ओर से मामले में प्रभावी पैरवी के बाद प्रथम विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
वर्ष 2014 में शहर कोतवाली पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सूरज पाल निवासी ग्राम लक्ष्मीपुर, सहसपुर को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 9720 प्रतिबंधित गोलियां और डायजेपाम प्रतिबंधित सिरप की एक शीशी बरामद हुई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर प्रथम विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट ने शुक्रवार को आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। उधर, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को मादक पदार्थों की तस्करी में गिरफ्तार आरोपियों के मामलों में अदालत के समक्ष प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए हैं।