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महात्मा गांधी का हरिद्वार से था गहरा जुड़ाव
रतनमणी डोभाल/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 03 Oct 2013 01:19 AM IST
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महात्मा गांधी का धर्मनगरी हरिद्वार से गहरा जुड़ाव रहा है। साउथ अफ्रीका से भारत लौटने के बाद वह सीधे हरिद्वार पहुंचे थे। यहां वह सन 1915 में महाकुंभ में शामिल हुए और अंधविश्वास पर जमकर कटाक्ष किए। इतना ही नहीं वह हरिद्वार में फैली गंदगी से भी दुखी थे।
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साउथ अफ्रीका से भारत लौटने पर पहुंचे थे हरिद्वार
गांधी जी जब साउथ अफ्रीका में वहां के लोगों के संघर्ष में सक्रिय थे। इधर, भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध मुक्ति संघर्र्ष गति पकड़ रहा था। तभी कांग्रेेस के संस्थापकों में से एक सीएफ एंडूज ने गांधी जी को पत्र लिखा कि भारत को उनकी इस समय ज्यादा जरूरत है।
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भारत लौटकर उन्हें रविंद्र नाथ टैगोर, स्वामी श्रद्धानंद और पं. मदन मोहन मालवीय से मिलना चाहिए। उनकी सलाह पर सन् 1915 में गांधी जी साउथ अफ्रीका से भारत लौटे और सीधे स्वामी श्रद्धानंद से मिलने हरिद्वार पहुंचे। कांगड़ी ग्राम (गुरुकुल) में उनकी स्वामी जी से मुलाकात हुई।
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कुंभ में अंधविश्वास पर किए कटाक्ष
दोनों ने आजादी के आंदोलन पर गहन मंत्रणा की। स्वामी श्रद्धानंद उनकी सादगी व फकीरी देखकर बेहद प्रभावित हुए थे। 1915 में हरिद्वार में कुंभ मेला था। देश-विदेश के श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ था। महात्मा गांधी का डेरा भी कुंभ में लगा था। उस दौरान उन्होंने कुंभ में लोगों के अंधविश्वास पर जमकर कटाक्ष किए।
सन 1915 में गुरुकुल में मिले स्वामी श्रद्धानंद से
उनकी संग्रहित रचनाओं में लिखा गया है कि लोग उनके डेरे पर आते थे और पैर छूते। यह उन्हें बेहद खराब लगता था। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रदीप जोशी ने बताया कि गांधी जी 1917 में व्याख्यान देने भी गुरुकुल पहुंचे थे।
गंदगी देख दुखी थे गांधी जी
गांधी जी हरिद्वार में गंदगी से बहुत दुखी थे। उनकी संग्रहित रचनाओं में दर्ज है कि यहां गंदगी बहुत है। संकरी गलियां हैं और पतनालों पर पाइप नहीं लगे हैं। लोग गंगा स्नान कर जब इन संकरी गलियों से निकलते हैं तो खुले पतनाले का गंदा पानी उन पर गिरता रहता है।