कहीं, आपका गैस सिलेंडर एक्सपायरी तो नहीं
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खाने-पीने का सामान या फिर दवाइयों के एक्सपायरी होने की बात तो आपने सुनी होगी, लेकिन आपकी रसोई में इस्तेमाल हो रहा गैस सिलेंडर भी एक्सपायरी होता है। हर सिलेंडर पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है, मगर इसके बारे में उपभोक्ताओं को कम ही जानकारी रहती है।
अगर आप घर पर गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं, तो उसकी एक्सपायरी डेट जांच लें। इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। गैस सिलेंडर बनाते समय प्लांट से इस पर एक्सपायरी डेट लिखी जाती है। यह ए, बी, सी, डी के रूप में लिखी होती है। अक्सर इस पर उपभोक्ता का ध्यान नहीं जाता। यह कोड वर्ड गैस एजेंसी या फिर कंपनी के अधिकारियों को पता होता है।
यह साल के तीन महीनों को दर्शाते हैं। इस कारण कई बार डेट निकलने के बावजूद ऐसे गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंच जाते हैं। जानकारों की मानें तो कई बार सिलेंडर फटने की घटना कारण एक्सपायरी सिलेंडर का इस्तेमाल भी हो सकता है।
एक्सपायरी डेट आते ही हटा लिए जाते हैं सिलेंडर
चुग गैस एजेंसी के मालिका विनेश मित्तल बताते हैं कि सिलेंडर के ऊपरी हिस्से में बड़े अक्षरों में ये एल्फाबेट्स लिखे होते हैं, जिसके आगे अंकों में साल का जिक्र होता है। एक्सपायरी डेट आते ही प्लांट से ही सिलेंडर हटा लिए जाते हैं।
उनको टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है। वहीं, आईओसी के प्रबंधक सेल्स धीरेंद्र कुमार का कहना है कि हर सिलेंडर की 7 साल में रि-टेस्टिंग होती है, इसे एक्सपायरी नहीं कहा जाता। यह क्वाटरली होता है।
तय समय में सिलेंडर की प्लांट में ही इसकी जांच होती है, जिसके बाद आगे उसके उपयोग होने या न होने पर निर्णय लिया जाता है।
इनसेट
जानिए कोड वर्ड
ए- जनवरी से मार्च
बी- अप्रैल से जून
सी- जुलाई से सितंबर
डी- अक्तूबर से दिसंबर
ए-15 यानी सिलेंडर मार्च 2015 तक ही मान्य।
डी-20 यानी सिलेंडर दिसंबर 2020 तक वैध।