अब भारत में यहां कीजिए लंदन फोर्ट का दीदार, गुफा सर्किट से और भी रोमांचकारी होगी यात्रा
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अगर आप कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो यहां चले लंदन फोर्ट देखने चले आइए। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नवग्रह सर्किट, महाभारत सर्किट, भगवान शंकर सर्किट, भगवती सर्किट शुरू किए गए हैं। कहा कि पिथौरागढ़ में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए गुफा सर्किट विकसित किए जाएंगे। इसके लिए सात गुफाएं चिन्हित की गई हैं।
मंगलवार को पर्यटन मंत्री महाराज स्टेट प्लेन से सुबह 10.45 बजे नैनीसैनी हवाई पहुंचे। इसके बाद उन्होंने वित्तमंत्री प्रकाश पंत के साथ 12.30 बजे लंदन फोर्ट का लोकार्पण किया। इस दौरान पत्रकारों से संक्षिप्त वार्ता में महाराज ने कहा कि गोरखा शासनकाल में बना यह किला पर्यटन को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ पर्यटकों के लिए सुरक्षित स्थल है। फोर्ट को पर्यटन विभाग को स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए सचिव से वार्ता की गई है। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ को गुफा सर्किट से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए यहां सात गुफाएं चिन्हित की गई हैं।
महाराज ने कहा कि महाभारत सर्किट में पिथौरागढ़ का महत्वपूर्ण स्थान है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों का प्रवास यहां रहा है। माता कुंती ने यहीं से स्वर्गारोहण किया था। इससे पहले पालिका सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सीमांत के गर्म पानी के स्रोतों को विकसित किया जाएगा।
4.33 करोड़ से हुआ किले का जीर्णोद्धार
साथ ही ऑफ सीजन में पर्यटक अधिकाधिक संख्या में प्रदेश में आ सकें, इसकी व्यवस्था की जा रही है। ट्रेकिंग मार्गों पर साइनेज बोर्ड लगाने के लिए वन विभाग से वार्ता की जा रही है। इस दौरान वित्त मंत्री प्रकाश पंत, पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत, डीएम सी रविशंकर, पर्यटन विभाग के निदेशक अवस्थापना पुरुषोत्तम, जीएम केएमवीएन टीएस मर्तोलिया, पीआईयू के प्रोजेक्ट मैनेजर सीएम सिंह, आर्किटेक्ट प्रेरणा मनराल, जेई विनीत कुमार सिंह आदि थे।
लंदन फोर्ट किले का जीर्णोद्धार एडीबी के वित्तीय सहयोग से पर्यटन विभाग की प्रोजेक्ट इंक्रीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) भीमताल ने 4.33 करोड़ रुपये की लागत से किया। इसमें स्थानीय पत्थरों का प्रयोग किया गया है। फोर्ट के अंदर म्यूजियम, हस्तशिल्प, रेस्टोरेंट आदि की व्यवस्था की गई है। केएमवीएन को इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। 1791 में गोरखाओं ने इस किले का निर्माण किया। सुगौली संधि के बाद वर्ष 1815 में अंग्रेजों ने किले को अपने अधीन ले लिया। अंग्रेजों ने किले का नाम बाउलीगढ़ से बदलकर लंदन फोर्ट रख दिया। अंग्रेजों ने 1881 से इसी किले से तहसील कार्यालय का संचालन किया।