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उत्तराखंडः विपक्ष की रजामंदी के बावजूद पास नहीं हो पाया लोकायुक्त विधेयक
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:39 PM IST
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त्रिवेंद्र सिंह
- फोटो : AmarUjala
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विधानसभा में सदन के अंदर और बाहर भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध का शंखनाद करने वाली भाजपा सरकार के कदम लोकायुक्त विधेयक को लेकर अनायास ठिठक गए।
प्रचंड बहुमत होने के बावजूद उसका वार्षिक तबादला विधेयक के मामले में विपक्ष के दबाव में आना भी गले नहीं उतरा। सियासी हवाओं में सवाल उठे कि भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन के मुद्दे पर जब उसने तगड़ा स्टार्ट ले लिया था, तो ऐन वक्त पर उसे ब्रेक क्यों लगाने पड़े?
दोनों विधेयकों पर सरकार की पूरी तैयारी नहीं थी, तो इन्हें सदन पटल पर लाने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। बेशक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यह कह रहे हैं कि उनकी सरकार पूर्वाग्रहों से कार्रवाई नहीं करना चाहती और ऐसा लोकायुक्त बनाना चाहती है जिसकी तटस्थता पर सबको भरोसा हो, लेकिन धर्मयुद्ध पर ये युद्ध विराम सवालों में तो है ही। बेशक ये थोड़े समय के लिए सही।
वरना सत्तारुढ़ होने के दिन से ही सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है। उसका ये रुख विधानसभा में पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण में दिखाई दिया। अभिभाषण में सरकार ने खंडूड़ी राज के तबादला और लोकायुक्त विधेयक को लाने का वचन लिया। सदन के बाहर जिस अंदाज में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के मुआवजा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी, उसने सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के वादे को मजबूती प्रदान की। ये संदेश गया कि इस मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेगी।
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सदन के भीतर लोकायुक्त व लोकसेवक वार्षिक स्थानांतरण विधेयक, 2017 लाकर उसने न सिर्फ चौंकाया बल्कि इससे उसके सख्त इरादे भी जाहिर हुए। उसके पास 57 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। लिहाजा सदन में लाए गए उसके विधेयक को पराजित करना 11 की संख्या वाले विपक्ष की कुव्वत में नहीं था।
मगर बेहद नाटकीय ढंग से सरकार ने विपक्ष के दबाव में स्थानांतरण विधेयक प्रवर समिति को भेज दिया और लोकायुक्त विधेयक को प्रवर समिति के हवाले करने की उसने खुद पहल कर डाली। उसके इस कदम से विपक्ष भी हैरान था क्योंकि उसने लोकायुक्त विधेयक पर लाये गए संशोधन प्रस्ताव को वापस ले लिया था।अपने इस रुख पर सरकार सदाशयता दिखाने की बात कह रही है, मगर जब तक वह दोनों विधेयकों को पारित नहीं कराएगी, सवाल उसका पीछा करते रहेंगे।
सरकार पूर्वाग्रहोंसे ग्रसित होकर काम नहीं करेगी। न ही बदले की भावना से काम करेगी। सदन में हमारी गंभीरता देख ली गई है। सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। वह विधेयकों को आसानी पास करा सकती है, मगर सरकार मजबूत लोकायुक्त बनाना चाहती है। ऐसा लोकायुक्त जो पूरी तटस्थता के साथ जांच करे।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
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प्रचंड बहुमत होने के बावजूद उसका वार्षिक तबादला विधेयक के मामले में विपक्ष के दबाव में आना भी गले नहीं उतरा। सियासी हवाओं में सवाल उठे कि भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन के मुद्दे पर जब उसने तगड़ा स्टार्ट ले लिया था, तो ऐन वक्त पर उसे ब्रेक क्यों लगाने पड़े?
दोनों विधेयकों पर सरकार की पूरी तैयारी नहीं थी, तो इन्हें सदन पटल पर लाने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। बेशक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यह कह रहे हैं कि उनकी सरकार पूर्वाग्रहों से कार्रवाई नहीं करना चाहती और ऐसा लोकायुक्त बनाना चाहती है जिसकी तटस्थता पर सबको भरोसा हो, लेकिन धर्मयुद्ध पर ये युद्ध विराम सवालों में तो है ही। बेशक ये थोड़े समय के लिए सही।
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वरना सत्तारुढ़ होने के दिन से ही सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है। उसका ये रुख विधानसभा में पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण में दिखाई दिया। अभिभाषण में सरकार ने खंडूड़ी राज के तबादला और लोकायुक्त विधेयक को लाने का वचन लिया। सदन के बाहर जिस अंदाज में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के मुआवजा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी, उसने सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के वादे को मजबूती प्रदान की। ये संदेश गया कि इस मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेगी।
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सदन के भीतर लोकायुक्त व लोकसेवक वार्षिक स्थानांतरण विधेयक, 2017 लाकर उसने न सिर्फ चौंकाया बल्कि इससे उसके सख्त इरादे भी जाहिर हुए। उसके पास 57 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। लिहाजा सदन में लाए गए उसके विधेयक को पराजित करना 11 की संख्या वाले विपक्ष की कुव्वत में नहीं था।
मगर बेहद नाटकीय ढंग से सरकार ने विपक्ष के दबाव में स्थानांतरण विधेयक प्रवर समिति को भेज दिया और लोकायुक्त विधेयक को प्रवर समिति के हवाले करने की उसने खुद पहल कर डाली। उसके इस कदम से विपक्ष भी हैरान था क्योंकि उसने लोकायुक्त विधेयक पर लाये गए संशोधन प्रस्ताव को वापस ले लिया था।अपने इस रुख पर सरकार सदाशयता दिखाने की बात कह रही है, मगर जब तक वह दोनों विधेयकों को पारित नहीं कराएगी, सवाल उसका पीछा करते रहेंगे।
सरकार पूर्वाग्रहोंसे ग्रसित होकर काम नहीं करेगी। न ही बदले की भावना से काम करेगी। सदन में हमारी गंभीरता देख ली गई है। सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। वह विधेयकों को आसानी पास करा सकती है, मगर सरकार मजबूत लोकायुक्त बनाना चाहती है। ऐसा लोकायुक्त जो पूरी तटस्थता के साथ जांच करे।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री