लोकसभा चुनाव 2019: उत्तराखंड की इस सीट पर अब तक 11 बार रहा है कांग्रेस का कब्जा
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उत्तराखंड की नैनीताल लोकसभा सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है। इस सीट पर 16 लोकसभा चुनावों में से 11 बार कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। उत्तराखंड बनने के बाद से चार चुनावों में से तीन में कांग्रेस का ही कब्जा रहा है।
इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बेटे केसी पंत ने हैट्रिक मारी थी, जबकि नारायण दत्त तिवारी तीन बार और केसी सिंह बाबा दो बार सांसद रहे हैं। बाबा की हैट्रिक का रथ पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी ने रोका था। कांग्रेस के ही डॉ. महेंद्र पाल सिंह एक बार जनता दल और दूसरी बार कांग्रेस से चुनाव जीते।
कृष्ण चंद्र पंत ने हैट्रिक मारी
वर्ष 1951 में नैनीताल लोकसभा सीट बनी। 1951 एवं 1957 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के दामाद अल्मोड़ा निवासी चंद्र दत्त पंत कांग्रेस के टिकट पर जीते। इसके बाद 1962 से 1977 तक लगातार तीन बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इन तीनों चुनावों में कांग्रेस के कद्दावर नेता भवाली के पंडित पंत के बेटे कृष्ण चंद्र पंत ने हैट्रिक मारी थी।
1977 के चुनाव में इसी सीट पर भारतीय लोक दल के भारत भूषण ने जीत दर्ज की। कांग्रेस ने अपनी इस पारंपरिक सीट को दोबारा अपने पाले में लाने के लिए 1980 में भारत भूषण के सामने नारायण दत्त तिवारी को मैदान में उतार दिया और फिर यह सीट कांग्रेस ने जीत ली थी।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के प्रति सहानुभूति पर यहां से पार्टी के एनडी के करीबी सत्येंद्र चंद्र गुड़िया चुनाव जीते और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। 1989 में जनता दल से महेंद्र सिंह पाल चुनाव लड़े और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। यह सरकार तीन साल चली थी।
गोविंद बल्लभ पंत की बेटी इला पंत जीती
इसके बाद 1991 में कांग्रेस ने एनडी तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन राम लहर के कारण भाजपा के बलराज पासी ने उन्हें हरा दिया। 1996 के चुनाव में एनडी तिवारी इस सीट से चुनाव लड़कर दो साल के लिए सांसद बने। 1998 में भाजपा की टिकट पर गोविंद बल्लभ पंत की बेटी इला पंत जीती थी।
एक साल तक इला पंत के सांसद रहने के बाद फिर चुनाव हुआ तो 1999 में एनडी तिवारी ने फिर यह सीट अपने कब्जे में ले ली। एनडी तिवारी 2002 में उत्तराखंड के सीएम बने तो यह सीट खाली हो गई और उपचुनाव में इस सीट पर डा. महेंद्र सिंह पाल को उतारा गया।
अजय भट्ट इस सीट से प्रत्याशी
2004 से लगातार 2014 तक केसी सिंह बाबा सांसद बने। राज्य गठन के बाद से कांग्रेस की जीत देख भाजपा ने 2014 में रणनीति बदल दी और कुमाऊं के लोकप्रिय नेताओं में से एक पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को इस सीट पर प्रत्याशी बना दिया था।
कोश्यारी ने कांग्रेस के बाबा की हैट्रिक रोक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। लेकिन इस बार कोश्यारी के चुनाव न लड़ने के एलान के बाद भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को इस सीट से प्रत्याशी बनाया है। देखना यह है कि भाजपा इस सीट पर अपनी जीत को बरकरार रखती है या फिर कांग्रेस अपनी खोई सीट को वापस लाती है।