पीएम केयर्स फंड में डोनेट करते समय रहें सावधान, ठगी का शिकार होने से बचना है तो पढ़ें ये एडवाइजरी...
- लॉकडाउन में साइबर क्राइम से बचने के लिए साइबर थाने ने जारी की एडवाइजरी
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प्रधानमंत्री केयर्स फंड में रकम डोनेट करते समय सावधान रहें। इसके लिए किसी एप या साइट पर जाने की जरूरत नहीं हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप ठगी का शिकार हो सकते हैं। आरोग्य सेतु एप में नीचे लिंक दिया गया है। इसके अलावा main.ayush.gov.in वेबसाइट पर जाकर भी डोनेट कर सकते हैं। लॉकडाउन में साइबर क्राइम से बचने के लिए साइबर थाने ने एक एडवाइजरी जारी की है।
देहरादून एसटीएफ के डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि जागरूकता से साइबर क्राइम से बचा जा सकता है। क्रिमनल रोज ठगी के नए-नए तरीके निकाल कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि खुद के साथ-साथ आप अपने परिजनों और रिश्तेदारों को भी बताएं कि कोई किसी तरह के लालच में न आएं। साइबर ठग लालच में फंसाकर ही दूसरों के खातों से रकम उड़ाते हैं। यदि कोई ठगी का शिकार हो भी जाता है तो पुलिस को जरूर सूचना दें।
इन बातों का रखें ध्यान
- किसी शॉपिंग वेबसाइट पर खरीदारी और सामान बेचते समय सावधान रहें। सेना के नाम का सहारा लेकर ठगी करने वालों की लंबी फौज सक्रिय है।
- कोई आपका मित्र अथवा परिचित बनकर पैसा डलवाने के लिए आपके नेटबैंकिंग की अकाउंट आदि जानकारी मांगे तो देने से बचें।
- इनाम निकलने की व्हाट्सएप आदि पर आने वाले एसएमएस का संज्ञान लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे संदेशों को तुरंत डिलीट करें।
- मोबाइल पर आने वाले किसी भी तरह के लिंक को खोलने की भूल न करें। ऐसे लिंक को पूरी तरह नजरअंदाज करें।
ईजी स्पिट पाउच में थूकने से नहीं फैलेगा संक्रमण
जगह-जगह थूकने से कोरोना संक्रमण फैलने को रोकने के लिए ईजी स्पिट पाउच काफी सहायक होगा। सोमवार को कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी नेहा जोशी ने दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना को नागपुर में बने 300 ईजी स्पिट पाउच प्रदान किए। यह एक पाउच है और इसे पेपर, पल्प और पॉलीमर से बनाया गया है। इसमें थूककर इसे अलग रखा जा सकता है।
यानी जब थूकना हो तो थूकिए, अलग रखिए और समय मिलने पर कूड़ेदान में डाल दीजिए। इसके इस्तेमाल से कोरोना संक्रमण की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। यह लार को सोख लेता है और गंदगी को फैलने से रोकता है। इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा 99 फीसदी कम हो जाता है। बायो डिग्रेबल मेटेरियल से बना होने के कारण इसे डिस्पोज करना भी आसान है। इस दौरान अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. अनुराग अग्रवाल, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी आदि उपस्थित रहे।