Lockdown 4.0 : मजदूरों की बदौलत देहरादून मंडल के डाकघरों में खुले रिकॉर्ड खाते
- एक महीने में देहरादून मंडल में खुले 20 हजार से ज्यादा आईपीपीबी के खाते, विभागीय अधिकारी गदगद
- पहले बिहार सरकार से मिल रही मदद के लिए मजदूर खुलवा रहे थे खाते
- अब केंद्र से मदद की आस में अन्य लोग भी लगे लाइन में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार से मदद की आस लगाए मजदूरों ने डाकघरों में खाता खुलवाकर विभाग को उपलब्धि दिला दी है। देहरादून मंडल में एक महीने में 20 हजार से ज्यादा खाते खोले गए। जो एक रिकॉर्ड है। इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंकिंग (आईपीपीबी) के खातों में अचानक आई तेजी से विभागीय अधिकारी भी गदगद हैं।
बिहार सरकार से आर्थिक मदद जारी होने पर 23 अप्रैल से बिहार मूल के मजदूरों ने डाकघरों में खाता खुलवाना शुरू किया था। तब से खाता खुलवाने के लिए रोजाना भीड़ उमड़ रही है। जीपीओ समेत कई शाखाओं में रोजाना 1000 से 1500 खाते खोले जा रहे हैं। प्रवर डाक अधीक्षक अनसूया प्रसाद चमोला ने बताया कि दून मंडल में अभी तक 20 हजार से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं। जिनमें जिले में 15 हजार से ज्यादा खाते खोले गए हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
खाता खुलवाने के लिए दो दिन लाइन में लगना पड़ रहा जीपीओ समेत अन्य डाकघरों में एडवांस टोकन सिस्टम लागू किया गया है। खाता खुलवाने के लिए लोगों को पहले टोकन लेना होता है। उसके अगले दिन टोकन संख्या के अनुसार लोगों को लाइन में स्थान दिया जाता है। लोगों का कहना है कि इससे समस्या यह आ रही है कि उन्हें दो-दो दिन डाकघर में पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, अभी भी डाकघरों में खाता खुलवाने के लिए भी भीड़ उमड़ी रही। कई लोग टोकन लेने के लिए देर रात से ही कई शाखाओं में पहुंच गए।
न काम है, न ही बचा पैसा, घर लौटने की है मजबूरी
932 प्रवासी मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लिए रवाना हुई। दून रेलवे स्टेशन से शुक्रवार को दोपहर बाद तीन बजे रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। इससे पहले मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग कर बसों से स्टेशन पहुंचाया गया।
स्टेशन के बाहर और कोच में भी श्रमिकों को खाने के पैकेट और पानी की बोतल वितरित की गई। इसमें रेलवे, जिला प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और समाजसेवी संगठनों का सहयोग रहा। इस दौरान स्टेशन पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया। हालांकि, ट्रेन के भीतर मजदूर एक-दूसरे से सटे हुए नजर आए। इस दौरान अधिकतर मजदूरों का कहना था कि अब कहीं काम मिल नहीं रहा। राशन व पैसा खत्म हो गया है इसलिए मजबूरन अब खाली हाथ घर लौट रहे हैं।
जिनको काम मिला वे नहीं गए
स्पेशल श्रमिक ट्रेन में 1152 मजदूरों के बैठने की व्यवस्था की गई थी,लेकिन शुक्रवार को सिर्फ 932 मजदूर ही दून से छत्तीसगढ़ रवाना हुए। मजदूरों ने बताया कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खुलने से उनके कुछ साथी अभी घर जाने को इच्छुक नहीं है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया टिकट का पैसा
ट्रेन से जाने वाले श्रमिकों के किराये को लेकर रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारी बृहस्पतिवार रात तक माथापच्ची करते रहे। कुल कितना टिकट लगेगा। यह क्लियर नहीं हो पा रहा था। सुपर फास्ट ट्रेन का प्रति किलोमीटर के हिसाब से देहरादून से रायपुर तक का किराया प्रति यात्री 635 रुपये तय हुआ। स्टेशन निदेशक गणेश चंद ठाकुर ने बताया कि यह पैसा छत्तीसगढ़ सरकार ने रेलवे को दे दिया है। हालांकि, रेलवे ने टिकट जिला प्रशासन के अधिकारियों को सौंप दिए थे। जो पंजीकृत श्रमिकों को बांटे गए।