Uttarakhand Lockdown: कलशों में बंद अस्थियों को अब मिलेगी मुक्ति, गंगा में हो सकेगा विसर्जन
अस्थि विर्सजन से रोक हटने से कई लोगों ने राहत की सास ली है। वे अब श्मशान घाटों में रखीं परिजनों की अस्थियों को गंगा में विर्सजित कर सकेंगे। लॉकडाउन की वजह से जीवन ही नहीं मृत्यु के बाद संस्कार भी अटक गए थे। दून के लक्खीबाग स्थित श्मशान में अंतिम संस्कार के बाद लोग दिवंगत की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने लिए अनुमति का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के भय से प्रशासन छूट नहीं दे रहा था।
ऐसे में लक्खीबाग स्थित श्मशान के लॉकर में अस्थि कलशों का ढेर लग गया था। लॉकर फुल होने के कारण लोग दिवंगतों के अस्थि कलश की पोटली बनाकर श्मशान परिसर में ही रखने लगे थे। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार दिवंगत की आत्म शांति के लिए अस्थि विसर्जन और पिंडदान जीवन चक्र का अहम हिस्सा है। ऐसे में लोग अपने दिवंगत परिजनों के लिए अस्थि विसर्जन, पिंडदान, भोज आदि कराते हैं।
अक्सर लोग दिवंगतों की अस्थियां गंगा या अन्य पवित्र नदियों में विसर्जित करते हैं और वहीं पिंडदान भी करते हैं। कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद से करीब डेढ़ महीने से लॉकडाउन है। गुरुवार तक हरिद्वार, ऋषिकेश समेत कई जगह प्रवेश प्रतिबंधित है।
ऐसे में लोग गंगा में अस्थियां प्रवाहित करने नहीं पहुंच पा रहे थे, लेकिन अब कैबिनेट ने अस्थि विर्सजन के लिए आने की छूट दे दी है। अब वाहन चालक के अलावा दो लोग हरिद्वार आकर अपने दिवंगत परिजन की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर सकेंगे।