गुलदार ने फिर किया शिकार, शिकारी करते रहे इंतजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून में बच्चे की जान लेने वाला गुलदार शिकारियों को दूसरे दिन भी चकमा दे गया। मचान और जंगल में छिपे शिकारी गुलदार का इंतजार ही करते रह गए और वह पिछले घटनास्थल से कुछ दूर एक गांव से सुबह-सवेरे कुत्ता उठा ले गया।
दोपहर में भी नदी के आसपास गुलदार देखे जाने की जानकारी मिलती रही। इस वजह से तीन दिन बाद भी क्षेत्र में दहशत कायम है।
देहरादून के बाजावाला क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता लगातार बनी हुई है। फूलसैंणी में दस साल के बच्चे कृष्ण को मारने के बाद गुलदार के शिकार के लिए शनिवार को ही क्षेत्र में चार शिकारी तैनात किए गए थे। लेकिन शनिवार रात गुलदार शिकारियों की मचान के नीचे बंधी बकरी उठा ले गया।
रविवार दिनभर गुलदार कहीं नजर नहीं आया। रात को फिर शिकारी मचान पर बैठे रहे, लेकिन गुलदार नहीं आया। सोमवार सुबह फूलसैंणी से करीब 500 मीटर आगे विजयनगर गांव में गुलदार घुसा और सरला देवी के घर से पालतू कुत्ते को उठा ले गया। लोगों का कहना था कि गुलदार पास ही नदी की ओर भाग गया। दोपहर में भी कुछ लोगों ने उसे नदी और गांव के बाहर घनी झाड़ियों में देखने की बात कही।
तीन दिन बाद भी क्षेत्र में दहशत कायम
शिकारियों की मौजूदगी के बावजूद गुलदार के गांव में बार-बार धमकने से ग्रामीणों में दहशत है। मसंदावाला, बाजावाला, फूलसैंणी, जामनवाला में लोगों ने बच्चों को अकेले छोड़ना बंद कर दिया है। महिलाएं भी समूह में आ-जा रही हैं।
स्कूल बंद कराएं
स्थानीय निवासी ममता थापा ने कहा कि जब तक गुलदार मारा या पकड़ा नहीं जाता, ग्रामीण खौफ से नहीं निकल सकेेंगे। उनका कहना था कि क्षेत्र के एक स्कूल में गांव के अधिकतर बच्चे पढ़ते हैं। अभिभावक स्कूल प्रबंधन से मांग कर चुके हैं कि गुलदार की सक्रियता को देखते हुए कुछ दिन के लिए अवकाश कर दे, लेकिन प्रबंधन नहीं मान रहा। मांग उठाई कि प्रशासन स्कूल बंद करवाकर बच्चों की सुरक्षा तय करे।
अफसर पहुंचे न नेता
सोमवार को क्षेत्रवासियों ने एक बार फिर वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। उनका सवाल था कि क्षेत्र में गश्त हो रही है तो गांव में घुस रहे गुलदार की मौजूदगी वन विभाग क्यों नहीं जान पा रहा है? ग्रामीणों का कहना था कि बच्चे की मौत के बाद भी क्षेत्र में प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी या नेता नहीं आया है। गुस्साए लोगों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से क्षेत्र में आने की मांग उठाई।
शिकारियों ने बदली अपनी चाल
दो दिन तक मचान में बैठकर आदमखोर गुलदार का इंतजार करते रहे शिकारियों ने उसे मारने के लिए चाल बदली है। सोमवार देर शाम चार शिकारियों के दल में से दो मचान पर बैठ गए थे, जबकि दो पास ही एक बड़े पत्थर के पीछे छिप गए। शिकारी शाहिद हुसैन ने बताया कि आदमखोर बच्चे को मारने के बाद से कहीं दूर नहीं गया है। वह लगातार घटनास्थल के आसपास ही बना है। अब उस पर दो तरफ से निगाह रखी जाएगी।
लग सकता है एक सप्ताह
शिकारियों ने बताया कि आदमखोर गुलदार घनी झाड़ियों में छिपा है। इस कारण वह नजर नहीं आता। उनका कहना था कि घटना के बाद से ग्रामीण देर रात तक घटनास्थल के आसपास झुंड बनाए जमे रहते हैं, जिससे गुलदार बाहर नहीं आ रहा। गुलदार अचानक वार करता है, लेकिन भीड़ के चलते गोली चलाना मुश्किल हो जाता है। बताया कि आदमखोर को मारने में तीन-चार दिन का वक्त लगता ही है, लेकिन कई बार एक-दो हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है।
मसंदावाला में बनाया घर
गुलदार का शिकार बने दस वर्षीय कृष्ण के परिवार ने सोमवार को मसंदावाला में नवीन उनियाल के खेत में झुग्गी डाल ली। डेढ़ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश से मजदूरी करने आए 36 वर्षीय कर्ण सिंह ने सोचा भी नहीं होगा कि यहां उनके घर का चिराग बुझ जाएगा।