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कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़ा: दो दिन बाद जिलाधिकारी को मिल जाएगी जांच रिपोर्ट 

Wed, 11 Aug 2021 10:23 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 11 Aug 2021 10:23 AM IST
सार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हुए कुंभ में कोरोना टेस्टिंग का बड़ा घोटाला सामने आया था। इसमें बड़ी संख्या में  लोगों के फर्जी नंबर अपलोड किए गए थे। प्रथम दृष्टया जांच में रिपोर्ट में अनियमितताएं मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सीडीओ सौरभ गहरवार की अध्यक्षता में जांच टीम का गठन किया था।

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kumbh covid test scam: After two days District Magistrate will get investigation report
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है। जांच के दौरान एक लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का सत्यापन किया गया है। जिनमें काफी गड़बड़झाला सामने आने की बात कही जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सौरभ गहरवार का कहना है कि जांच रिपोर्ट दो दिन बाद शुक्रवार को जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। 

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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हुए कुंभ में कोरोना टेस्टिंग का बड़ा घोटाला सामने आया था। इसमें बड़ी संख्या में  लोगों के फर्जी नंबर अपलोड किए गए थे। प्रथम दृष्टया जांच में रिपोर्ट में अनियमितताएं मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सीडीओ सौरभ गहरवार की अध्यक्षता में जांच टीम का गठन किया था। जिसमें जिला विकास अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह चौहान और मुख्य कोषाधिकारी नीतू को जांच समिति का सदस्य नामित किया था। जांच कमेटी को 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देष दिए गए थे, लेकिन दो माह का समय गुजर आने के बाद भी जांच रिपोर्ट डीएम को नहीं दी जा सकी है। 
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अब बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट में संदिग्ध एक लाख के आसपास मोबाइल नंबरों का सत्यापन कर रिपोर्ट लगभग तैयार की जा चुकी है। इसके साथ ही जांच जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। इससे मोबाइल नंबरों की सत्यापन रिपोर्ट और लोगों के बयानों के आधार पर रिपोर्ट का निष्कर्ष निकाला जा रहा है। जिससे जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर जारी किया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी सौरभ गहरवार ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार है। बस उसमें कुछ तथ्यों को जोड़ना बाकी है। वह भी आजकल मिल जाएंगे। दो दिन बाद जांच रिपोर्ट डीएम को दे दी जाएगी। 

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आरोपियों के रिश्तेदारों के घरों पर मारे छापे 

कोरोना जांच फर्जीवाडे़ में नामजद किए गए मैक्स कारपोरेट सर्विस के पार्टनर शरत व मल्लिका पंत के रिश्तेेदारों के यहां पर एसआईटी की टीम ने छापेमारी की। एसआईटी की दो टीमें नोएडा व नैनीताल में डेरा डाले हुए हैं। इसके साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश भी दी जा रही हैं।
 
महाकुंभ 2021 के दौरान धर्मनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड जांच में हुए फर्जीवाड़े के बाद मैक्स कारपोरेट सर्विस के पार्टनर शरत और मल्लिका पंत को मुकदमे में नामजद करते हुए उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए थे। एसआईटी की टीम को उनकी लोकेशन नोएडा व नैनीताल में मिली थी। जब तक एसआईटी की टीम नैनीताल पहुंची तो आरोपी वहां से निकल चुके थे।
 

इसके साथ ही नोएडा में पहुंचने के बाद उनके फोन भी बंद आ रहे थे। इसके साथ ही एसआईटी ने आरोपियों की कुर्की व एनबीडब्लू वारंट लेने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। एसआईटी की अलग-अलग दो टीमें पिछले दो दिनों से नैनीताल व नोएडा में डेरा डाले हुए है। इसके साथ ही आरोपियों के रिश्तेदारों के घरों पर भी छापेमारी की जा रही है। जांच अधिकारी राजेश शाह ने बताया कि एसआईटी की दो टीमें लगातार कार्रवाई कर रही है। 

सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार कुंभ मेले में कोरोना टेस्टिंग में फर्जीवाड़े के आरोपित मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज के सर्विस पार्टनर शरत पंत व मलिका पंत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को 20 अगस्त तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पुलिस उनको गिरफ्तार करने जा रही है जबकि वे आईओ के समक्ष जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

अभी तक वे आईओ के सामने पांच बार पेश हो चुके हैं और अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य का निर्णय उनके पक्ष में है। इसलिए कोर्ट के पूर्व के आदेश को बरकरार रखा जाए। पूर्व में इस संबंध में सरकार ने पूर्व के आदेश को वापस लेने संबंधी प्रार्थना पत्र दायर किया था, जिसे कोर्ट ने निरस्त कर याचिका को निस्तारित कर दिया था।

न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मैक्स के पार्टनर शरत पंत व मल्लिका पंत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेस में सर्विस प्रोवाइडर हैं। कोरोना टेस्टिंग मामले में परीक्षण और डेटा प्रविष्टि के दौरान मैक्स कॉरपोरेट का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। परीक्षण और डेटा प्रविष्टि का सारा काम स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में किया गया था। अधिकारियों की मौजूदगी में परीक्षण स्टालों ने जो कुछ भी किया था उसे अपनी मंजूरी दे दी। अगर कोई गलत कार्य कर रहा था तो कुंभ मेले की पूरी अवधि के दौरान अधिकारी चुप क्यों रहे। 

सीएमओ हरिद्वार ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि कुंभ मेले के दौरान इनके द्वारा अपने को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी तरीके से टेस्ट कराए गए। कोर्ट ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के आधार पर इनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। निर्णय में सात साल से कम सजा वाले केस में गिरफ्तार नहीं करने व जांच में सहयोग करने के दिशा निर्देश दिए गए थे।

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