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आपने खुशवंत को तश्तरी में सजा कर दे दिया...
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 20 Mar 2014 11:30 PM IST
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‘...देखिए यह पोस्ट कार्ड। खुशवंत जी ने इसे दो महीने पहले भेजा था। तब खुशवंत सिंह साहब ने सेहत की वजह से आने में असमर्थता जताई थी। आज तो मानो आपने उनको हमें तश्तरी में सजा कर दे दिया...’।
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यह बात आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अमरजीत सिंह संधू ने नटराज पब्लिशर्स के उपेंद्र के सामने खुश होकर कही थी, जब खुशवंत सिंह अपनी पुस्तक ‘नेचर वाच’ के प्रमोशन के सिलसिले में दून आए थे और इस क्रम में आईएमए भी पहुंचे थे।
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1997 में दून आए थे खुशवंत
17 साल पूर्व सन् 1997 का यह दौरा आज भी उपेंद्र की स्मृति में दर्ज है। खुशवंत सिंह के निधन की खबर आई तो सकते में रह गए उपेंद्र ने अपनी यादें अमर उजाला से साझा कीं।
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बकौल उपेंद्र खुशवंत सिंह सितंबर के आखिरी सप्ताह में शताब्दी से यहां पहुंचे थे। तकरीबन 82 साल के हो चुके थे। सेहत बहुत सफर की इजाजत नहीं देती थी। ऐसे में दून पहुंचे खुशवंत ने सेंट जोजफ्स एकेडमी, दून स्कूल, वेल्हम ब्वायज स्कूल, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज (आरआईएमसी) का भी दौरा किया था।
विद्यार्थियों के सवालों के दिए थे जवाब
खुशवंत ने अपनी किताबों के बारे में बताया था और छात्र-छात्राओं को आटो ग्राफ देते हुए उनके मन में उठ रहे सवालों का जवाब भी दिया था।
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ज्यादातर विद्यार्थियों का प्रश्न उनके प्रोफेशन से जुड़ा था। मसलन अच्छा लेखक किस तरह बना जा सकता है? इस दौरान उन्होंने पब्लिशिंग हाउस पर भी दून के लोगों के साथ मुलाकात की थी।
सबसे ज्यादा बिकी 'नाट ए नाइस मैन टू नो'
दून में सर्वाधिक बिक्री खुशवंत सिंह की पुस्तक 'नाट ए नाइस मैन टू नो' रही। इसकी हजार से भी अधिक प्रतियां पाठकों ने खरीदीं। उनकी यह किताब अंत तक इन प्रिंट रही।