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खतरों से भरा है केदारनाथ का रास्ताः हरीश रावत
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 05 Oct 2013 11:04 PM IST
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केदारनाथ पहुंचे केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत का कहना है कि केदारघाटी के पुनर्निर्माण के लिए समय कम है और काम ज्यादा। रावत ने कहा कि इस रास्ते पर खतरे ही खतरे हैं। रास्ता चलने लायक नहीं है। कोई और रास्ता देखना पड़ेगा।
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केदारनाथ पहुंचने पर उन्होंने साफ कहा कि यह रूट बिल्कुल नहीं चलेगा। 2014 की यात्रा के लिए किसी दूसरे रूट की खोज करनी होगी। रावत ने पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि आने वाली यात्रा की तैयारी का जो भी काम होना है, वह अभी होना चाहिए।
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रावत ने गुरुवार को सोनप्रयाग से करीब सौ लोगों के साथ यात्रा शुरू की थी। शुक्रवार सुबह सात बजे रावत जत्थे के साथ गौरीकुंड से केदारनाथ के लिए रवाना हुए। बीच में मौसम खराब होने केकारण उन्हें रुकना भी पड़ा। शाम पांच बजे रावत केदारनाथ पहुंचे और पहुंचते ही उन्होंने केदारनाथ मंदिर की ओर रुख किया।
फोन पर हुई बातचीत में रावत ने कहा कि रुट की अभी फौरी व्यवस्था की गई है पर यात्रियों के लायक यह मार्ग नही है। 2014 की यात्रा के लिए सरकार को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मार्ग की तलाश करनी होगी।
बहुत सारा काम बाकी है
रावत के मुताबिक अभी बहुत सारा काम बाकी है और समय कम है। यात्रा को व्यवस्थित करने के लिए सरकार को तुरंत ही कई सारे काम करने होंगे। नए रुट के लिए नए अलाइनमेंट की जरूरत होगी। सरकार को इसके लिए युवा और स्थानीय विशेषताओं से परिचित अफसरों को यह काम सौंपना चाहिए।
इसके साथ ही केदारनाथ और इससे पहले के तीन-चार पड़ावों में प्री फेब्रीकेटिड मकानों केजरिए रहने-ठहरने की व्यवस्था की जा सकती है। रावत के मुताबिक केदारनाथ से लेकर गौरीकुंड के बीच 2014 में यात्रियों सहित करीब पांच हजार लोग होंगे।
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इन लोगों के लिए पूरी व्यवस्था करने का काम अभी से शुरू हो जाना चाहिए। सड़क निर्माण का काम तुरंत पूरा नहीं किया गया तो यह मामला भी लंबा खिचेंगा। रावत ने कहा कि पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखना होगा।