भैया दूज पर बंद होंगे केदारनाथ मंदिर के कपाट
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भगवान शिव के 11 वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शनिवार (भैया दूज) को लग्नानुसार सुबह आठ बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
भगवान की डोली प्रथम प्रवास में रात्रि विश्राम रामपुर में करेगी। विभिन्न पड़ावों में विश्राम करती हुई भगवान की चल विग्रह 27 अक्तूबर को शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी।
शीतकाल के छह माह बाबा केदार की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में होगी। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट चार मई को ग्रीष्मकाल में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुले थे।
केदारनाथ मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष दीपावली के एक दिन बाद भैया दूज को बंद होते हैं। लेकिन परंपरानुसार, विजयादशमी के दिन कपाट बंद होने की तिथि और डोली के शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल पहुंचने की औपचारिक घोषणा की जाती है।
स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को दिया जाएगा समाधि का रूप
शनिवार को कपाट बंद होने से पूर्व भोले बाबा के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रुप दिया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में विशेष समाधि पूजा के साथ लिंग को भस्म से ढका जाएगा।
इसके पश्चात श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। पूजा-अर्चना के पश्चात बाबा की चल विग्रह डोली ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी।
यह है कार्यक्रम
25 अक्तूबर: सुबह सवा आठ बजे तुला लग्न में कपाट बंद होंगे, इसी दिन डोली प्रस्थान कर रात्रि प्रवास के लिए रामपुर में करेगी।
26 अक्तूबर: रामपुर से गुप्तकाशी प्रस्थान। रात्रि प्रवास गुप्तकाशी।
27 अक्तूबर: गुप्तकाशी से ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान। मंदिर में होगी बाबा की मूर्ति विराजमान।