कांवड़ यात्रा में हिंदू-मुस्लिम का अनोखा संगम
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खुद रोजा रखा है। लेकिन सेवा का जज्बा ऐसा है कि कई मुस्लिम, भोले के भक्तों की सेवा में लगे हुए हैं।
स्वयं भले ही कुछ न खाएं-पीएं लेकिन कांवड़ियों के लिए जगह-जगह खानपान का पूरा इंतजाम किया हुआ है। रमजान का पाक महीना और हरिद्वार में कांवड़ मेला साथ-साथ चल रहा है।
ज्वालापुर में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। कांवड़िये हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर ज्वालापुर की मुख्य रोड से ही गुजरते हैं।
हिंदू-मुस्लिम एकता का अनोखा उदाहरण
ज्वालापुर में इस मार्ग पर अधिकतर दुकानें मुस्लिम समुदाय के लोगों की हैं। कांवड़िये थककर इन्हीं दुकानों के आगे कांवड़ रखकर आराम करते हैं।
यहां पर दुकानदारों की ओर से कांवड़ियों को बैठने के लिए कुर्सियां तक उपलब्ध कराई जाती हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद यहां कभी भी कांवड़ियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी बात नहीं हुई।
आसपास के मोहल्लों में रहने वाले मुस्लिमों की ओर से कांवड़ियों के पीने के लिए पानी और केले आदि की पूरी व्यवस्था की गई है। कई मुस्लिम युवक कांवड़ियों के लिए दवा आदि के इंतजाम में भी जुटे हुए हैं।
मेला देता है सालभर की रोटी
ज्वालापुर के सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के लिए कांवड़ मेला सालभर की रोजी-रोटी का जुगाड़ करता है।
भोले के भक्त जिन कांवड़ को लेकर जाते हैं, उनमें से अधिकतर कांवड़ मुस्लिम परिवारों की ओर से बनाई जाती हैं। मेले से एक माह पहले ज्वालापुर की कई मुस्लिम बस्तियों में कांवड़ बनाने का काम शुरू हो जाता है।
हर धर्म में इंसानियत का पाठ पढ़ाया जाता है। इंसान की सेवा हर धर्म में बताई गई है। हम मंगलवार को ज्वालापुर में कांवड़ियों के लिए जलपान की व्यवस्था कर रहे हैं। बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कांवड़ियों की सेवा करेंगे।
- राव आफाक अली, पूर्व प्रधान सलेमपुर