दशकों बाद दोबारा खुलेगी गढ़वाल-कुमाऊं को सीधे जोड़ने वाली यह सड़क

ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Mar 2017 11:55 PM IST
kandi road
गढ़वाल-कुमाऊं को जोड़ने वाली यह सड़क अब दोबारा से खोली जाएगी। सीएम त्रिवेंद्र स‌िंह रावत ने सीएम बनने के बाद यह पहली घोषणा की है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह कहकर लोगों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं कि कंडी रोड (गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों को जोड़ने के लिए लिए लालढांग-कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग) खुलवाना उनके सरकार की प्राथमिकता है।
कंडी रोड पर मुख्यमंत्री की इच्छा सामने आते ही कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सक्रियता दिखाते हुए लोक निर्माण और वन विभाग के उच्चाधिकारियों की मंगलवार को मीटिंग बुलाई है। डॉ. रावत ने बताया कि सरकार इस मामले में तेजी से काम करने की तैयारी में है। अफसरों से फीडबैक लेकर इस पर ठोस काम शुरू किया जाएगा।

इस मामले से जुड़े जानकार कहते हैं कि इस रोड को खुलवाने के लिए सरकार को केंद्र में अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखना होगा। अदालत को ही अपने पक्ष से सरकार को सहमत करवाना होगा। गढ़वाल और कुमाऊं की रोड कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम कंडी रोड मामले में अब तक खूब सियासत हुई है।

सियासत करने में बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार भी पीछे नहीं रही है।  इस रोड के लिए कई बार आंदोलन भी हुए हैं, मगर कुछ नतीजा नहीं निकला। कंडी मार्ग पर अंग्रेजी शासनकाल में भी आवाजाही होती थी। कालागढ़ से कोटद्वार और रामनगर के लिए जाने वाला कंडी मार्ग का उपयोग गढ़वाल-कुमाऊं के लोग प्राचीनकाल से करते आ रहे हैं। यह मार्ग नैनीताल और हरिद्वार के लिए सीधा पड़ता है। 

कालागढ़ से हरिद्वार की दूरी मात्र 76 किमी और हल्द्वानी की दूरी भी लगभग 70 किमी पड़ती है। इस मार्ग पर कार्बेट टाइगर रिजर्व बन जाने से आम आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इससे इसका लाभ उत्तराखंड की जनता को नहीं मिल पा रहा है। यदि यह मार्ग आम आवागमन के लिए खुल जाएगा तो उत्तराखंड के शहरों की दूरी बहुत कम हो जाएगी और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बीच से होकर गुजरने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी। 

उत्तराखंड के दोनों मंडलों गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने के लिहाज से इस रोड का खुलना बहुत जरूरी है। अभी की स्थिति में गढ़वाल से कुमाऊं तक पहुंचने के लिए यूपी के कुछ हिस्से से गुजरना पड़ता है। इससे लोगों का समय भी ज्यादा लगता है और उत्तराखंड के वाहनों को अतिरिक्त टैक्स भी भरना पड़ता है।
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कंडी मार्ग पर अंग्रेजी शासनकाल से होती रही आवाजाही 

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