दशकों बाद दोबारा खुलेगी गढ़वाल-कुमाऊं को सीधे जोड़ने वाली यह सड़क
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गढ़वाल-कुमाऊं को जोड़ने वाली यह सड़क अब दोबारा से खोली जाएगी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम बनने के बाद यह पहली घोषणा की है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह कहकर लोगों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं कि कंडी रोड (गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों को जोड़ने के लिए लिए लालढांग-कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग) खुलवाना उनके सरकार की प्राथमिकता है।
कंडी रोड पर मुख्यमंत्री की इच्छा सामने आते ही कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सक्रियता दिखाते हुए लोक निर्माण और वन विभाग के उच्चाधिकारियों की मंगलवार को मीटिंग बुलाई है। डॉ. रावत ने बताया कि सरकार इस मामले में तेजी से काम करने की तैयारी में है। अफसरों से फीडबैक लेकर इस पर ठोस काम शुरू किया जाएगा।
इस मामले से जुड़े जानकार कहते हैं कि इस रोड को खुलवाने के लिए सरकार को केंद्र में अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखना होगा। अदालत को ही अपने पक्ष से सरकार को सहमत करवाना होगा। गढ़वाल और कुमाऊं की रोड कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम कंडी रोड मामले में अब तक खूब सियासत हुई है।
सियासत करने में बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार भी पीछे नहीं रही है। इस रोड के लिए कई बार आंदोलन भी हुए हैं, मगर कुछ नतीजा नहीं निकला। कंडी मार्ग पर अंग्रेजी शासनकाल में भी आवाजाही होती थी। कालागढ़ से कोटद्वार और रामनगर के लिए जाने वाला कंडी मार्ग का उपयोग गढ़वाल-कुमाऊं के लोग प्राचीनकाल से करते आ रहे हैं। यह मार्ग नैनीताल और हरिद्वार के लिए सीधा पड़ता है।
कालागढ़ से हरिद्वार की दूरी मात्र 76 किमी और हल्द्वानी की दूरी भी लगभग 70 किमी पड़ती है। इस मार्ग पर कार्बेट टाइगर रिजर्व बन जाने से आम आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इससे इसका लाभ उत्तराखंड की जनता को नहीं मिल पा रहा है। यदि यह मार्ग आम आवागमन के लिए खुल जाएगा तो उत्तराखंड के शहरों की दूरी बहुत कम हो जाएगी और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बीच से होकर गुजरने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी।
उत्तराखंड के दोनों मंडलों गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने के लिहाज से इस रोड का खुलना बहुत जरूरी है। अभी की स्थिति में गढ़वाल से कुमाऊं तक पहुंचने के लिए यूपी के कुछ हिस्से से गुजरना पड़ता है। इससे लोगों का समय भी ज्यादा लगता है और उत्तराखंड के वाहनों को अतिरिक्त टैक्स भी भरना पड़ता है।
कंडी मार्ग पर अंग्रेजी शासनकाल से होती रही आवाजाही
कंडी रोड फारेस्ट और जिम कार्बेट नेशनल पार्क एरिया से होकर गुजरती है। यह अस्थायी तौर पर बनी हुई सड़क है, जिसे यदि स्थायी कर दिया जाए, तो गढ़वाल और कुमाऊं के लोग यूपी की सीमा में प्रवेश किए बिना ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाएंगे। कंडी रोड का शुरुआती प्वाइंट पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र में है, जो कि कुमाऊं के रामनगर क्षेत्र तक जाता है। करीब सौ किलोमीटर की यह सड़क है।
कंडी रोड की पेचीदगी
जंगल और वन्य जंतुओं से जुडे़ कठोर प्रावधानों के कारण इस रोड के खुलने में दिक्कत रही है। खंडूड़ी सरकार ने इस रोड के प्रोजेक्ट के लिए 374 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। वन विभाग से ही इस पर काम शुरू कराया गया था, लेकिन बीच में कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को बना दिया गया। कानूनी अड़चन भी आई और एनओसी का मसला भी उठा, तो इस प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया। इस प्रोजेक्ट पर काम पूरा करने के लिए केंद्र में मजबूत पैरवी की दरकार है। इसके अलावा, न्यायालय को भी आश्वस्त करना जरूरी होगा कि इस रोड के खुलने से वन और वन्य जंतुओं को कोई नुकसान नहीं होगा।
कैबिनेट मंत्री ने आज बुलाई मीटिंग
-कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत ने कंडी रोड मामले में लोक निर्माण और वन विभाग के उच्चाधिकारियों की मंगलवार को मीटिंग बुलाई है। डा रावत ने बताया कि सरकार इस मामले में तेजी से काम करने की तैयारी में है। अफसरों से फीडबैक लेकर इस पर ठोस काम शुरू किया जाएगा।
कंडी मार्ग पर अंग्रेजी शासनकाल से होती रही आवाजाही
कालागढ़ से कोटद्वार और रामनगर के लिए जाने वाला कंडी मार्ग का उपयोग गढ़वाल-कुमाऊं के लोग प्राचीनकाल से करते आ रहे हैं। यह मार्ग नैनीताल और हरिद्वार के लिए सीधा पड़ता है। कालागढ़ से हरिद्वार की दूरी मात्र 76 किमी और हल्द्वानी की दूरी भी लगभग 70 किमी पड़ती है। इस मार्ग पर कार्बेट टाइगर रिजर्व बन जाने से आम आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इससे इसका लाभ उत्तराखंड की जनता को नहीं मिल पा रहा है। यदि यह मार्ग आम आवागमन के लिए खुल जाएगा तो उत्तराखंड के शहरों की दूरी बहुत कम हो जाएगी और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बीच से होकर गुजरने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी।