क्या आपको पता है? घोड़े और गैंडे हैं 'रिश्तेदार'
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क्या आप जानते हैं कि घोड़े और गैंडे का पूर्वज एक ही जानवर था और उस जानवर की उत्पत्ति कहां हुई थी?
वैज्ञानिकों की मानें तो इस प्राणी का नाम कैंबेथेरियम थियोसिस है और इसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी। वैज्ञानिकों ने यह बात गुजरात की कोयले की एक खान से मिले जीवाश्मों के अध्ययन के आधार पर कही है। इस खान से साल 2002 से जीवाश्म मिल रहे हैं।
इस पर वैज्ञानिकों का एक अंतरराष्ट्रीय दल शोध कर रहा था। इस दल में एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रो. आरएस राणा भी शामिल थे। लगभग 14 साल के शोध के बाद इस दल ने महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले हैं।
कोयले की खान से मिली 200 हड्डियां
शोधकर्ता प्रो. राणा ने बताया कि कोयले की खान से 200 हड्डियां (दांत, जबडे़, सिर, रीढ़ की हड्डी व पांव) मिली हैं। यह हड्डियां लगभग साढ़े पांच करोड़ साल पहले आदि नूतन युग के जानवर कैंबेथेरियम थियोसिस की हैं।
उन्होंने बताया कि जीवाश्म के आधार पर इसको पेरिसोडेक्टाइल जाति (विषम खुर वाले जानवर) का माना गया। इसका कद लगभग एक फुट और वजन 20 से 35 किलोग्राम होता था। सुअर के समान दिखने वाला यह प्राणी घिसटकर चलता था।
घोड़े और गैंडे के वंशजों के समान इसकी भी पांच अंगुलियां थीं। शोध में यह साबित हुआ कि कैंबेथेरियम थियोसिस नामक यह प्राणी गैंडे और घोड़ों का आदिम रिश्तेदार है। आज तक वैज्ञानिक इस संबंध में अलग-अलग तथ्य देते आए हैं।
विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुई रिपोर्ट
इस प्राणी की उत्पत्ति भारत में हुई है। प्राचीन काल में जब महाद्वीप एक-दूसरे से अलग या जुड़ रहे थे, तब यह प्राणी भी अलग-अलग स्थानों पर फैल गया। प्रो. राणा ने बताया कि जैसे-जैसे जीवाश्म मिलते जाएंगे, स्थिति और स्पष्ट होती जाएगी।
इस शोध रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशन’ ने ‘अर्ली इओसिन फॉसिल्स सजेस्ट दैट द मेमेलियन पेरिसोडेक्टाइलस आरिजिनेटेड इन इंडिया’ शीर्षक से 20 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया है।
शोध दल में प्रो. आरएस राणा, किशोर कुमार, प्रो. अशोक साहनी, ल्यूक टी हॉलब्रुक, कैटरीना ई जोन्स, हीथर अरहेंस, पीटर मिसेन और थेरी स्मिथ शामिल थे।