जेपी जोशी को राहत, आरोपों से मुकरी युवती
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बहुचर्चित जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में बृहस्पतिवार को नया मोड़ आ गया। निलंबित अपर सचिव पर आरोप लगाने वाली युवती अदालत में मुकर गई।
अपनी गवाही में युवती ने कहा कि ब्लैकमेलिंग के आरोपी नीरज चौहान और संजय बनर्जी के दबाव में ही उसने जोशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मजिस्ट्रेटी बयान भी उसने दबाव में दिए जाने की बात कही।
पीड़ित युवती ने 22 नवंबर 2013 को तत्कालीन अपर सचिव (गृह) जेपी जोशी के खिलाफ दिल्ली के पांडवनगर थाने में जीरो एफआईआर कराई थी। युवती के बयान दर्ज होते ही पुलिस ने जोशी को गिरफ्तार कर लिया था। जोशी तब से जिला जेल में बंद है। इस बीच शासन ने जोशी को निलंबित कर दिया।
बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम नीना अग्रवाल की अदालत में युवती की गवाही हुई। युवती ने कहा कि जेपी जोशी ने कभी उसके साथ दुराचार नहीं किया, न ही कभी कोई अभद्रता की।
उसने कहा कि ब्लैकमेलिंग के आरोपी नीरज चौहान और संजय बनर्जी उसे लेकर दिल्ली गए थे। जहां उस पर केस दर्ज करने का दबाव बनाया गया। मामले में अब युवती की अगली गवाही एक अक्तूबर को होगी।
पूर्व कांग्रेस नेत्री को रितु भी क्लीन चिट
अदालत में दी गवाही में युवती ने यूथ कांग्रेस की पूर्व नेत्री रितु कंडियाल को भी क्लीन चिट दी। रितु पर आरोप था कि उसने ही युवती को जोशी के पास भेजा था। युवती ने अदालत में कहा कि रितु से उसकी दोस्ती फेसबुक के जरिये हुई थी। युवती के मुताबिक नीरज और संजय के दबाव में ही उसने केस में रितु का भी नाम लिखा दिया था।
‘मुझ पर कोई दबाव नहीं’
अदालत ने युवती से पूछा कि उसके चेहरे पर उलझन दिख रही है, कहीं वह दबाव में गवाही तो नहीं दे रही? इस पर युवती ने कहा कि वह दस माह से जेल में है और इस बीच किसी के संपर्क में नहीं आई है। उसने कहा कि उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक है और मालूम है कि वह क्या बयान दे रही है। उसने कहा कि उस पर कोई दबाव नहीं है।
अमर उजाला ने किया था सहमति का खुलासा
युवती और जोशी के बीच आरोप वापस लेने पर चार महीने पहले ही सहमति बन गई थी। अमर उजाला ने 23 मई 2014 के अंक में इसका खुलासा किया था। सूत्रों के मुताबिक युवती को जोशी पर लगाए आरोप वापस लेने थे, जबकि जोशी की ओर से युवती को ब्लैकमेलिंग के केस से बाहर निकालने में मदद की जानी थी। युवती की मई से लगातार अदालत में गवाही टलती आ रही थी। आखिर बृहस्पतिवार को अमर उजाला की खबर सही साबित हुई।
कब क्या हुआ
22 नवंबर 2013: पीड़िता ने जोशी के खिलाफ दिल्ली में जीरो एफआईआर कराई।
22 नवंबर 2013: जेपी जोशी ने पीड़िता और कुछ अन्य पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए दून के बसंत विहार थाने में मामला दर्ज कराया।
दिसंबर 2013: पुलिस ने जेपी जोशी सहित कुछ अन्य को गिरफ्तार किया।
20 दिसंबर 2013: पीड़िता ने नाटकीय अंदाज में सरेंडर किया।
18 सितंबर 2014: कोर्ट में मुकर गई पीड़िता।
बयान बदलने पर युवती की बढ़ सकती है आफत
यौन शोषण के आरोप से युवती के मुकरने के बाद जेपी जोशी को जरूर राहत मिल सकती है, लेकिन युवती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दरअसल, जोशी लगातार जमानत याचिका दायर करते रहे, लेकिन हर बार केस को प्रभावित करने की आशंका के चलते इसे खारिज किया जाता रहा है। हालांकि जमानत मिल जाए तो भी जोशी को बरी किए जाने की कोई गारंटी नहीं है।
वहीं, बार-बार बयान बदलने और झूठ बोलने पर युवती के खिलाफ अदालत संज्ञान लेकर धारा 192 (अदालत में झूठे साक्ष्य पेश करना) के तहत केस दर्ज कर सकती है। इसमें उसे सात साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।
ब्लैकमेलिंग का है आरोप
युवती के जोशी के खिलाफ केस दर्ज कराने के कुछ ही दिन बाद जांच में यह बात सामने आई थी कि जोशी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई। इस मामले में युवती समेत निलंबित संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया, शाइनी मैक, संजय बनर्जी, नीरज चौहान, अनिल गर्ग को आरोपी बनाया गया था। युवती ने 20 दिसंबर 2013 को इस मामले में कोर्ट में सरेंडर किया था, तब से वह जेल में है। वहीं, बाकी अन्य आरोपी भी अलग-अलग तारीखों को गिरफ्तार किए गए। सभी जेल में बंद हैं।
फिर भी जोशी को हो सकती है सजा
युवती के अलग-अलग बयान से साफ है कि या तो उसने पहले झूठ बोला या अब झूठ बोल रही है। लेकिन उसके मुकरने से यह जरूरी नहीं कि जोशी को क्लीन चिट मिल जाए। कई मामलों में मुख्य गवाह के मुकरने के बाद भी आरोपी को सजा सुनाई गई है।
-आरएस राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता।
मुख्य गवाह युवती के आरोपों से मुकरने के बाद अब जेपी जोशी को जमानत मिलनी तय है। जोशी के खिलाफ मामला खत्म भी हो सकता है। वहीं गवाही से मुकरना युवती के खिलाफ ही जाएगा। पहले ही वह ब्लैकमेलिंग की आरोपी है, अब उस पर और आरोप बढ़ सकते हैं।
-रजिया बेग, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की पूर्व अध्यक्ष।
हम तो पहले से ही कह रहे थे कि इस मामले में कोई दम नहीं है। जोशी निर्दोष थे, जिन्हें बेवजह फंसाया गया। युवती के अदालत में आरोपों से मुकरने के बाद यह बात साफ हो गई है।
-चंद्रशेखर तिवारी, जोशी के पूर्व अधिवक्ता।