Joshimath: शहर का सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी, बदरीनाथ मास्टर प्लान की तर्ज पर राहत पैकेज दे सकती है सरकार
शासन के सूत्रों की मानें तो सरकार बीच का रास्ता निकालते हुए जोशीमठ का सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजे का एलान कर सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जोशीमठ में भूधंसाव के बाद उपजी परिस्थितियों के बीच सरकार के लिए आपदा प्राभावितों का पुनर्वास और राहत पैकेज देना चुनौती बना हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही बाजार दर पर मुआवजा देने का एलान कर चुके हैं, जबकि प्रभावित बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान की तर्ज पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। शासन के सूत्रों की मानें तो सरकार बीच का रास्ता निकालते हुए जोशीमठ का सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजे का एलान कर सकती है।
जोशीमठ में आपदा प्रभावितों का पुनर्वास और राहत पैकेज तैयार करने के लिए सरकार ने अपर मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है। 27 जनवरी को शासन में कमेटी की बैठक होनी है। इसके अलावा जिलाधिकारी चमोली की अध्यक्षता में भी एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी शासन को मुआवजे की प्राथमिक रिपोर्ट सौंप चुकी है। इसमें जोशीमठ में हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया गया है। फाइनल रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। इसके बाद ही शासन स्तर पर जोशीमठ पुनर्वास नीति बनाई जाएगी।
अभी तक जोशीमठ में 863 भवनों में दरारें दर्ज की गई हैं, जबकि 181 भवनों को पूरी तरह से असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। शासन के सूत्रों की मानें तो सरकार जोशीमठ का सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजे का एलान कर सकती है। जैसा कि बदरीनाथ के मामले में किया गया था।
बदरीनाथ में दिया गया था दोगुना मुआवजा
बदरीनाथ धाम को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर ‘स्मार्ट स्प्रिचुअल हिल टाउन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सरकार ने भूमि और भवनों का मुआवजा वर्तमान में निर्धारित सर्किट रेट के अनुसार भूमि के मूल्य का दोगुना मुआवजा दिया था।
विशेष मामलों में हर बार बनी है नई पुनर्वास नीति
वर्ष 2013 की आपदा के बाद सरकार ने उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए अलग से पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण नीति बनाई थी। इसके बाद जमरानी बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति- 2022 और सौंग बांध बहु उद्देश्यीय परियोजना की पुनर्वास एवं पुनर्विस्थापन की नीति-2022 बनाई थी।
कृषि भूमि
- प्रमुख मार्ग से 0 से 200 मीटर तक 540 लाख प्रति हे.(सर्किल रेट)- 458 लाख रुपये प्रति हे.(संशोधित दर)
- प्रमुख मार्ग से 201 से 350 मीटर तक - 481 लाख रुपये प्रति हे. (सर्किल रेट)- 1299 लाख प्रति हे.(संशोधित दर)
- प्रमुख मार्ग से 351 मीटर से अधिक 444 लाख प्रति हे.(सर्किल रेट) - 1199 प्रति हेक्टेयर(संशोधित दर)
- प्रमुख मार्ग से 0 से 200 मीटर तक 6500 प्रति वर्ग मीटर(सर्किल रेट) - 17550 रुपये प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- प्रमुख मार्ग से 201 से 350 मीटर तक 5800 प्रति वर्ग मीटर (सर्किल रेट)- 15600 प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- प्रमुख मार्ग से 351 मीटर से अधिक 5400 प्रति वर्ग मीटर (सर्किल रेट)-14580 प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- दुकान, रेस्टोरेंट्स, कार्यालय 40200 प्रति वर्ग मीटर(सर्किल रेट) - 52355 प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान 38400 प्रति वर्ग मीटर (सर्किल रेट)- 50555 रुपये प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- प्रथम श्रेणी पक्का - 27300 रुपए प्रति वर्ग मीटर (सर्किल रेट)- 27300 प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
- द्वितीय श्रेणी पक्का-कच्चा - 21100 रुपये प्रति वर्ग मीटर(सर्किल रेट) - 21100 रुपये प्रति वर्ग मीटर(संशोधित दर)
जोशीमठ के सर्किल रेट की दरें
कृषि भूमि
- प्रमुख मार्ग से 0 से 200 मीटर तक - 250 लाख प्रति हे.
- प्रमुख मार्ग से 201 से 350 मीटर तक - 222 लाख रुपये प्रति हे.
- प्रमुख मार्ग से 351 मीटर से अधिक 205 लाख प्रति हे.
अकृषि भूमि
- प्रमुख मार्ग से 0 से 200 मीटर तक 6500 प्रति वर्ग मीटर
- प्रमुख मार्ग से 201 से 350 मीटर तक 5800 प्रति वर्ग मीटर
- प्रमुख मार्ग से 351 मीटर से अधिक 5400 प्रति वर्ग मीटर
वाणिज्य भवन की दर
- दुकान, रेस्टोरेंट्स, कार्यालय 40200 प्रति वर्ग मीटर
- अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान 38400 प्रति वर्ग मीटर
गैर वाणिज्य भवन की दर
- प्रथम श्रेणी पक्का - 23200 रुपए प्रति वर्ग मीटर
- द्वितीय श्रेणी पक्का-कच्चा - 20600 रुपये प्रति वर्ग मीटर
राज्य में आपदा प्रभावितों के लिए पुनर्वास, विस्थापन नीति 2021 लागू है। लेकिन चूंकि जोशीमठ का मामला बिल्कुल अलग है, इसलिए जोशीमठ आपदा पुनर्वास नीति अलग से बनाई जाएगी। इसी नीति के अनुसार प्राभावितों को मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए जिले से फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर फैसला लिया जाएगा। जो भी नीति बनेगी, लोगों के हित में होगी।
- डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव आपदा प्रबंधन विभाग