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अमेरिकी सेटेलाइट से हो रही जिम कार्बेट की मैपिंग
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 05 May 2018 10:54 AM IST
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corbett park
- फोटो : file photo
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जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व की मैपिंग अमेरिका के सेटेलाइट वर्ल्ड व्यू-4 से की जा रही है। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है, जबकि मैपिंग में अमेरिका के इस सेटेलाइट की मदद ली जा रही है। सेटेलाइट की खास बात यह है कि जमीन के पांच मीटर ऊपर तक की मैपिंग करने में यह सक्षम है।
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वन विभाग उत्तराखंड और भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के बीच हुए समझौते के तहत यह मैपिंग शुरू की गई है। बता दें कि अमेरिका ने वर्ल्ड व्यू-4 सेटेलाइट 11 नवंबर 2016 को लॉन्च किया था। इससे उच्च गुणवत्ता की बेहतरीन तस्वीरें ली जा सकती हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के मुताबिक, इस सेटेलाइट से बाघों के वासस्थल को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। साथ ही कार्बेट के जंगल में वृक्षों के घनत्व का भी बेहतर अंदाजा लगाया जा सकेगा।
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अध्ययन के दौरान मिले जनवरों के पदचिह्न और वर्ल्ड व्यू-4 की तस्वीरों से सड़क निर्माण का रास्ता साफ होगा।
मैपिंग में कार्बेट टाइगर रिजर्व का करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र प्रमुखता से शामिल किया गया है। मैपिंग के लिए डल्यूआईआई ने 16 सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम बनाई है। इस टीम में आठ संकाय सदस्य और आठ शोधार्थी शामिल हैं। टीम एक साल के भीतर मैपिंग के अलावा ग्राउंड सर्वे कर अपनी रिपोर्ट वन विभाग को सौंपेगी।
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कंडी मार्ग के लिए हो रही मैपिंग
उत्तराखंड में अभी तक गढ़वाल से कुमाऊं मंडल को जोड़ने वाला रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। करीब 30 वर्षों से प्रदेश में कंडी मार्ग की मांग की जा रही है, जो केवल उत्तराखंड के बीच से कुमाऊं तक पहुंचता है। इस रास्ते के बनने से गढ़वाल से कुमाऊं के बीच की दूरी 162 किलोमीटर से घटकर 90 किलोमीटर रह जाएगी। रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व था। अब रास्ता बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इतना आसान नहीं होगा रास्ता निकालना
भारतीय वन्य जीव संस्थान के पुराने सर्वेक्षण के मुताबिक, जहां से रास्ता निकलना है, वहां वन्य जीवों का वासस्थल है। वर्ष 2011 में हुए सर्वेक्षण में पाया गया था कि यहां बाघों का वासस्थल है। वर्ष 2015 की गणना के मुताबिक, कार्बेट टाइगर रिजर्व में 240 बाघ हैं। इनके संरक्षण की लगातार कोशिशें की जा रही हैं। पुराने सर्वेक्षण में यह बात भी साफ हो चुकी है कि इस क्षेत्र में बाघों का आवागमन होता है।
‘कंडी मार्ग के लिए वर्ल्ड व्यू-4 सेटेलाइट से मैपिंग शुरू कर दी गई है। हाल ही में वन विभाग के साथ हमारा एमओयू साइन हुआ है। हमारा मकसद वन्य जीवों के वास स्थलों को संरक्षित रखते हुए विकास का खाका तैयार करना है।’
- डॉ. वीबी माथुर, निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान