लगन को सम्मान, उत्तराखंड के मानसिंह को जमनालाल बजाज पुरस्कार
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उत्तराखंड के गांधीवादी और सर्वोदयी सेवक वयोवृद्ध मान सिंह रावत वर्ष 2015 के जमनालाल बजाज पुरस्कार के लिए चयनित किए गए हैं। जमनालाल बजाज फाउंडेशन के चेयरमैन राहुल बजाज ने इस बात की जानकारी उन्हें ईमेल से भेजी है।
उन्हें यह पुरस्कार रचनात्मक कार्यों के लिए लिए दिया जाएगा। चार नवंबर को यह पुरस्कार राष्ट्रपति अथवा उनके द्वारा अनुमोदित शीर्ष हस्ती द्वारा प्रदान किया जाएगा। सर्वोदयी नेता को प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर गढ़वाल सर्वोदय मंडल के कार्यकर्ताओं में खुशी है।
गढ़वाल सर्वोदय मंडल कोटद्वार के अध्यक्ष गोविंद डंडरियाल और उपाध्यक्ष शिक्षाविद् विनोद चंद्र कुकरेती ने बताया कि संगठन की ओर से वयोवृद्ध सर्वोदयी नेता मानसिंह रावत के जीवनभर के संघर्ष और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के बारे में जमनालाल फाउंडेशन को रिपोर्ट भेजी गई थी।
वर्ष 1954 में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और इसके बाद जेपी आंदोलन में सक्रिय रहे मान सिंह रावत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आदर्श हैं। अपना पूरा जीवन उन्होंने नशामुक्ति और बोक्सा जनजाति के उद्धार में खपा दिया।
88 साल की उम्र में भी आंदोलनों में सक्रिय
88 वर्ष की उम्र में भी वह उत्तराखंड में मद्यनिषेध लागू करवाने और नशामुक्ति के आंदोलन में सक्रिय हैं। उनके संघर्षों में उनकी धर्मपत्नी शशिप्रभा रावत भी दिनरात की साथी रही हैं। गांधी जी की शिष्या सरला बहन के आश्रम से जुड़ी शशिप्रभा ने मानसिंह रावत की सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी को देखते हुए उन्हें जीवनसाथी चुना और तब से वे एकसाथ सर्वोदय और नशामुक्ति के कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं।
वर्तमान में मानसिंह रावत अपने परिवार के साथ कोटद्वार भाबर के हल्दूखाता गांव में निवास कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी वह निरंतर बोक्सा जनजाति के स्कूल के संचालन के साथ ही सर्वोदय के कार्यों को देख रहे हैं। उन्हें पुरस्कार के लिए चयनित करने से कोटद्वार भाबर ही नहीं समूचे उत्तराखंड में हर्ष है।
इन हस्तियों को मिला है जमनालाल बजाज पुरस्कार
उत्तराखंड में इससे पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता राधा बहन, पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा की धर्मपत्नी विमला बहुगुणा और हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी को रचनात्मक कार्यों के लिए यह पुरस्कार मिल चुका है।