अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2020: कॉर्बेट पार्क है बाघों का सिरमौर, हर 100 वर्ग किलोमीटर में मौजूद हैं 14 बाघ
- दुनिया में सबसे अधिक संभावना है कॉर्बेट में बाघों के दिखने की
- हर सौ वर्ग किलोमीटर में मौजूद हैं 14 बाघ, घनत्व दुनिया में सबसे अधिक
- बाघ गणना की विस्तृत रिपोर्ट से हुआ उजागर
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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस से ठीक एक दिन पहले जारी बाघों की गणना की विस्तृत रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बाघों के मामले में कम से कम कॉर्बेट दुनिया का सिरमौर है। रिपोर्ट के मुताबिक कॉर्बेट ही दुनिया का एकमात्र ऐसा आरक्षित क्षेत्र है, जहां सबसे ज्यादा बाघ सबसे कम जगह का उपयोग करते हैं। मतलब यहां बाघों का जनसंख्या घनत्व दुनिया में यहां सबसे ज्यादा है।
कॉर्बेट में बाघों की गणना के लिए करीब 5004 फोटोग्राफ लिए गए। यहां 231 बाघ पाए गए। कुल मिलाकर 266 बाघ इस लैंडस्केप का उपयोग कर रहे हैं। यहां प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में 14 बाघ पाए गए हैं। यह जनसंख्या घनत्व दुुनिया में सबसे अधिक बताया गया है। यहां 16 शावक भी पाए गए। बाघों की अधिक संख्या का सबब है कि यहां के बाघ लैंसडौन वन प्रभाग, तराई पश्चिम, अमनगढ़, रामनगर वन प्रभाग आदि में भी पहुंच रहे हैं।
राजाजी पार्क : पूर्वी में संख्या बढ़ी, पश्चिम में दो बाघिन
रिपोर्ट राजाजी टाइगर पार्क के बारे में भी दिलचस्प तथ्य सामने रख रही है। यहां पश्चिम क्षेत्र में सिर्फ दो बाघिन हैं। कुल मिलाकर यहां 38 बाघ हैं। प्रति सौ वर्ग किलोमीटर पर यहां आठ बाघ हैं। यहां 12 शावक भी मिले।
काला भालू देहरादून की वजह से नहीं आते लैंसडौन के पश्चिम क्षेत्र में
रिपोर्ट बताती है कि लैंसडौन वन प्रभाग के पूर्वी क्षेत्र में हिमालयन ब्लैक बियर मौजूद हैं लेकिन वन प्रभाग के पश्चिम क्षेत्र में नहीं आते। इसकी वजह देहरादून शहर का होना भी बताया गया है। कहा गया है कि दून शहर के कारण भालू पूर्व से पश्चिम की ओर नहीं जा पा रहे हैं। लैंसडौन वन प्रभाग में 34 बाघ मिले और यहां तीन शावक भी पाए गए। 4.36 प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में यहां बाघ पाए गए।
टाइगर ट्रांसलोकेशन को मिली मजबूती
प्रदेश सरकार की योजना कॉर्बेट से बाघों को शिफ्ट करने की है। रिपोर्ट से सरकार का यह काम कुछ आसान भी हुआ है। हालांकि कॉर्बेट को बाघों के भोजन और जैव विविधता की दृष्टि से बेहतरीन पाया गया है।