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Dehradun News: अगस्त में होगा अंतरराष्ट्रीय एशियाई जल पर्यावरण प्रौद्योगिकी मंच
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एशिया के जल भविष्य को आकार देने के लिए देहरादून में पांचवां अंतरराष्ट्रीय एशियाई जल पर्यावरण प्रौद्योगिकी मंच का आयोजन किया जाएगा। 6 से 8 अगस्त तक यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में एशिया और अन्य देशों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधि जल और पर्यावरण तकनीकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह मंच जापान के यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, भारत के आईआईटी रुड़की और यूपीईएस देहरादून के स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, मेक्सिको के टेक्नोलॉजिको डी मोंटेरे और भारत के राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलवायु-लचीला जल तंत्र बनाना, भूजल की कमी, कीटनाशक प्रदूषण और जलग्रहण क्षेत्र के क्षरण जैसे मुद्दों का समाधान खोजना है। साथ ही, सतत प्रबंधन की नीतियों को बढ़ावा देना और समुदाय-आधारित समावेशी जल शासन पर ध्यान देना भी इसकी प्राथमिकता होगी।
यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा, जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और जल संकट जैसी दोहरी चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में मंच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और नीति के जरिए सामूहिक समाधान खोजने के लिए बेहद जरूरी हैं। देहरादून जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में इसका आयोजन, वैश्विक सोच के साथ स्थानीय समाधान की भावना को दर्शाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, जापान के प्रो. फुतोशी कुरिसु ने खुशी जाहिर की कि 12 वर्षों के बाद यह मंच फिर से भारत लौट रहा है और अबकी बार देहरादून जैसे सुरम्य हिमालयी शहर में हो रहा है।
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कार्यक्रम में एशिया और अन्य देशों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधि जल और पर्यावरण तकनीकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह मंच जापान के यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, भारत के आईआईटी रुड़की और यूपीईएस देहरादून के स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, मेक्सिको के टेक्नोलॉजिको डी मोंटेरे और भारत के राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलवायु-लचीला जल तंत्र बनाना, भूजल की कमी, कीटनाशक प्रदूषण और जलग्रहण क्षेत्र के क्षरण जैसे मुद्दों का समाधान खोजना है। साथ ही, सतत प्रबंधन की नीतियों को बढ़ावा देना और समुदाय-आधारित समावेशी जल शासन पर ध्यान देना भी इसकी प्राथमिकता होगी।
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यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा, जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और जल संकट जैसी दोहरी चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में मंच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और नीति के जरिए सामूहिक समाधान खोजने के लिए बेहद जरूरी हैं। देहरादून जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में इसका आयोजन, वैश्विक सोच के साथ स्थानीय समाधान की भावना को दर्शाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, जापान के प्रो. फुतोशी कुरिसु ने खुशी जाहिर की कि 12 वर्षों के बाद यह मंच फिर से भारत लौट रहा है और अबकी बार देहरादून जैसे सुरम्य हिमालयी शहर में हो रहा है।
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