अपने ही जाल में फंसी IAS एकेडमी में घुसी महिला 'जासूस'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईएएस अकादमी मसूरी में रूबी चौधरी के फर्जी तरीके से प्रशिक्षु आईएएस के रूप में रहने के मामले में रूबी अपने ही जाल में फंस गई है। अकादमी पर उसके द्वारा लगाए गए अधिकतर आरोप हवाई साबित हुए।
अलबत्ता अकादमी के करीब सात कर्मचारियों की सुरक्षा में घोर लापरवाही उजागर हुई है। पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने सोमवार को विवेचना की समीक्षा कर कुछ निर्देश दिए। उम्मीद है कि एक-दो दिन में पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।
एलबीएस राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में रूबी चौधरी के फर्जी आईएएस के रूप में ट्रेनिंग लेने के गुब्बारे की विवेचना के बाद हवा निकल गई। रूबी छह माह अकादमी में बतौर प्रशिक्षु आईएएस के रूप में रही। 26 मार्च के करीब यह मामला पकड़ में आया तो रूबी को बिना कार्रवाई के वहां से निकाल दिया गया।
31 मार्च को जाकर मसूरी कोतवाली में एलबीएस अकादमी की तरफ से रूबी के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस जांच के बाद एसआईटी का गठन किया गया।
रूबी ने अकादमी के अफसरों पर लगाए थे आरोप
रूबी चौधरी ने गिरफ्तारी के बाद अकादमी के आला अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए। दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम जुड़ने के कारण यह मामला और भी संगीन हो गया।
एसआईटी ने व्यापक स्तर पर जांच पड़ताल के साथ बयान दर्ज किए। अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर के अलावा उनके पीए, डायरेक्टर के पीए, डिप्टी डायरेक्टर फोटोग्राफर निधि शर्मा, दो प्रशिक्षु आईएएस और आईटीबीपी के जवानों और सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज हुए। रूबी से भी कई दौर में बातचीत हुई। रिमांड पर अकादमी की किताबों के अलावा दूसरे तरह के रिकार्ड कब्जे में लिए गए।
आरोपों में नहीं मिला दम
एसआईटी की विवेचना लगभग पूरी हो गई। एक-दो दिन में पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले में रूबी चौधरी के खिलाफ अकाट्य साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में उसकी परेशानी बढ़ने वाली है। विवेचकों ने माना है कि रूबी ने अधिकतर बातें मनगढंत कही हैं।
अकादमी को क्लीन चिट देने की तैयारी
हेड राइटिंग की रिपोर्ट में डिप्टी डायरेक्टर पर लगाया गया आरोप निराधार रहा। सूत्रों का कहना है कि विवेचना में एक तरह से अकादमी को क्लीन चिट मिलने वाली है। अकादमी के स्टाफ को सिर्फ सुरक्षा में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। ऐसे लोगों की संख्या 6 और 7 के बीच हो सकती है।
153 दिन और छह विवेचक
एलबीएस अकादमी के गंभीर प्रकरण की विवेचना पूरी करने में एसआईटी को 153 दिन लग गए। पहले दिन यह विवेचना इंस्पेक्टर के सुपुर्द की गई, लेकिन अगले दिन उन्हें हटाकर दूसरे इंस्पेक्टर के सुपुर्द हो गई। शाम तक जांच सीओ मसूरी द्वारा किए जाने के आदेश हो गए। अगले दिन डीजीपी ने एएसपी शाहजहां अंसारी की अगुवाई में एसआईटी गठित कर दी।
विवेचना के अंतिम चरण में पहुंचते ही अंसारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बाद में एएसपी ममता बोरा को यहां जांच स्थानांतरित हुई। इसी बीच डीजीपी बीएस सिद्धू ने विवेचना सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी। शासन द्वारा सीबीआई जांच को नकार दिए जाने के बाद विवेचना आईपीएस सदानंद दाते के नेतृत्व में गठित एसआईटी को दी गई। अब जाकर यह विवेचना पूरी हुई।
डीजीपी का है कहना
एलबीएस अकादमी के रूबी प्रकरण की विवेचना पूर्ण हो गई है। रूबी चौधरी के अलावा अकादमी के कुछ कर्मचारियों का दोष निर्धारण भी हो गया है। जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
-बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक