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Dehradun News: हाईकोर्ट के स्टे की कार्रवाई से उद्योग जगत को मिली राहत
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उद्योगों की एनओसी रद्द किए जाने के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फैसले पर हाईकोर्ट के स्टे के बाद उद्योग जगत ने राहत की सांस ली है। सेलाकुई स्थित औद्योगिक इकाईयों संचालकों व औद्योगिक संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी उद्योगों की एनओसी को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया था। जिससे औद्योगिक इकाईयों पर बंदी की तलवार लटक गई थी। औद्योगिक संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए एनओसी रद्द करने के आदेश को अदालत ने स्टे कर दिया।
ड्रग मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष प्रमोद कलानी व महासिचव संजय सकारिया ने कहा कि उद्योगों को एकदम से बंद किया जाना अव्यवहारिक है। रोजगार, व्यापार व राजस्व आदि की दृष्टि से औद्योगिक इकाईयां प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उद्योगों को राहत देना न्यायालय का सराहनीय कदम है।
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उधर उत्तराखंड इंडस्ट्रीयल वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव महेश शर्मा ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले से उद्योगों को अपने पंजीकरण की कार्रवाई के लिए समय मिल जाएगा। फूड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल मारवाह ने स्टे की कार्रवाई को सराहनीय बताते हुए कहा कि कोर्ट से मिले समय में सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उद्योगों की सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
कोर्ट की कार्रवाई उद्योगों के लिए बड़ी राहत है। उद्योगों ने अपनी याचिका में कहा था कि एनओसी रद्द किए जाने का फैसला उद्योगों के हित में नहीं है जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश को स्टे कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने अगली निर्धारित 20 दिसंबर की तिथि पर सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ उद्योगों की बात सुनने के लिए भी कहा है। -डॉ.हरेंद्र कुमार गर्ग, याचिकाकर्ता व अध्यक्ष सिडकुल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन हरिद्वार।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी उद्योगों की एनओसी को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया था। जिससे औद्योगिक इकाईयों पर बंदी की तलवार लटक गई थी। औद्योगिक संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए एनओसी रद्द करने के आदेश को अदालत ने स्टे कर दिया।
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ड्रग मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष प्रमोद कलानी व महासिचव संजय सकारिया ने कहा कि उद्योगों को एकदम से बंद किया जाना अव्यवहारिक है। रोजगार, व्यापार व राजस्व आदि की दृष्टि से औद्योगिक इकाईयां प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उद्योगों को राहत देना न्यायालय का सराहनीय कदम है।
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उधर उत्तराखंड इंडस्ट्रीयल वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव महेश शर्मा ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले से उद्योगों को अपने पंजीकरण की कार्रवाई के लिए समय मिल जाएगा। फूड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल मारवाह ने स्टे की कार्रवाई को सराहनीय बताते हुए कहा कि कोर्ट से मिले समय में सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उद्योगों की सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
कोर्ट की कार्रवाई उद्योगों के लिए बड़ी राहत है। उद्योगों ने अपनी याचिका में कहा था कि एनओसी रद्द किए जाने का फैसला उद्योगों के हित में नहीं है जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश को स्टे कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने अगली निर्धारित 20 दिसंबर की तिथि पर सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ उद्योगों की बात सुनने के लिए भी कहा है। -डॉ.हरेंद्र कुमार गर्ग, याचिकाकर्ता व अध्यक्ष सिडकुल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन हरिद्वार।