उत्तराखंड के सीएम का दावा- सड़क हादसे रुक जाएं तो 10 प्रतिशत होगी देश की जीडीपी
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सड़क सुरक्षा सेमिनार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यदि देश में सड़क दुर्घटनाएं बंद हो जाएं तो जीडीपी अपने आप 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। हादसों में हो रही मौतों की वजह से जीडीपी तीन प्रतिशत कम है।
उन्होंने कहा कि कानून से ट्रैफिक नहीं सुधारा जा सकता, इसके लिए जागरुकता और सामूहिक प्रयास की जरूरत है। सेमिनार में खास बात यह रही कि ट्रैफिक सुधार के प्रस्तावों और मांग पर मुख्यमंत्री एक शब्द नहीं बोले। जबकि कहा जा रहा था कि तीन भर के सुझावों पर मुख्यमंत्री फैसला लेंगे।
शनिवार को सेेंट जोजेफ्स एकडेमी में आयोजित सेमिनार में सीएम त्रिवेंद्र रावत ने भाषण का शुभारंभ बच्चाें से भारत माता की जय का नारा लगवाकर किया। इसके बाद बच्चों से सवाल किया कि उनकी छुट्टी कब होती है, जवाब मिला तीन बजे।
इस पर सीएम बोले कि घबराएं नहीं, मैं लंबा-चौड़ा भाषण नहीं देने वाला हूं। उन्हाेंने कहा कि एक व्यक्ति की मौत से परिवार की अर्थव्यवस्था बिखर जाती है। इसका दूरगामी प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
जीडीपी को होने वाले नुकसान में कमी लाने को दुर्घटनाओं पर रोक जरूरी है। उन्हाेंने अभिभावकों से खुद के साथ बच्चाें में भी यातायात नियमाें के पालन के संस्कार डालने को कहा। सीएम ने डीजीपी से कहा कि ऐसे परिजनों को सम्मानित किया जाए, जो बच्चों को संरक्षण देने के बजाय उनकी गलती स्वीकारते हैं।
ट्रैफिक वेबसाइट का लोकार्पण
ट्रैफिक वेबसाइट का लोकार्पण
सीएम ने ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट का शुभारंभ किया। एआईजी केवल खुराना ने बताया कि वेबसाइट में उत्तराखंड के नक्शे के अलावा तमाम हेल्पलाइन, बड़े अस्पतालों, ट्रामा सेंटरों, ट्रैफिक अपडेट और ट्रैफिक नियम उपलब्ध करेंगे। वेबसाइट में ट्रैफिक में सुधार के सुझाव, फीडबैक और फोटो भी अपलोड किए जा सकते हैं।
अपने मकसद में कामयाब रही सेमिनार
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि सेमिनार अपने मकसद में कामयाब रही है। ट्रैफिक को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से हुए मंथन का परिणाम भविष्य में नजर आएगा। यह भी पता चला कि दूसरे विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर क्या-क्या कर रहे हैं। पुलिस के अलावा एमडीडीए, शिक्षा विभाग और पीडब्लूडी ने अपनी कार्ययोजना बताई है।
42 हजार से पहुंचे 26 लाख वाहन
पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने सड़क सुरक्षा सेमिनार का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश गठन के दौरान 42 हजार वाहन रजिस्टर्ड थे, जो बढ़कर 26 लाख पहुंच हो गए हैं। उस हिसाब से ट्रैफिक पुलिस का नियतन और सड़कों का विस्तारीकरण नहीं हो पाया है। डीजीपी ने कहा कि किसी भी राज्य का प्रतिबिंब वहां की यातायात व्यवस्था है। जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, हम सकारात्मक स्तर तक नहीं पहुंच पाएंगे।
सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मृत्यु 18 से 35 वर्ष के उम्र के युवाओं की हो रही है। अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण नशे में वाहन चलाना, मोबाइल फ ोन का प्रयोग, रैश ड्राइविंग, ओवर लोडिंग, खराब रोड, मानवीय त्रुटि और पहाड़ी मार्गों पर पर्याप्त संकेत चिह्न नहीं होना भी है। गढ़वाल के डीआईजी पुष्पक ज्योति और कुमाऊं के डीआईजी पूर्ण सिंह रावत ने अपने रेंज की ट्रैफिक व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण दिया।
नौ घंटे लंबी क्लास में तड़पे बच्चे
यह रखे गए प्रस्ताव
- सब-वे फुट ओवर ब्रिज का निर्माण।
- फुटपाथों का निर्माण मेट्रो रेल के लिए प्रयास
- रिंग रोड एवं बाईपास मार्गों का निर्माण।
- स्कूलों-कॉलेजों में पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
- कस्बाें में नियमित यातायात पुलिस बल की नियुक्ति।
- नए पार्किंग स्थल विकसित करना। मल्टी स्टोरी पार्किंग का निर्माण।
- रेलवे क्रासिंग के ऊपर रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण।
नौ घंटे लंबी क्लास में तड़पे बच्चे
सड़क सुरक्षा की नौ घंटे लंबी क्लास में बच्चे तड़पते रहे। पुलिस ने सेमिनार में स्कूली बच्चों को बुलाने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। यही वजह थी कि सेमिनार में बच्चे ही शामिल थे। दोपहर में बच्चाें का लंच का पैकेट दिया गया। बच्चों की तरफ से बीच में पानी न मिलने के कारण फ्रूटी की डिमांड की गई थी, मगर किसी ने एक नहीं सुनी। सीएम बच्चों का दर्द समझ गए थे, तभी उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत उनसे बात कर की थी।