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राजाजी पार्क में बनी दीवार अवैध
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 28 Aug 2014 02:02 PM IST
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राजाजी पार्क के गौहरी माफी में बनाई जा रही सुरक्षा दीवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध करार दिया है।
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पार्क प्रशासन को दीवार हटाने का निर्देश
ट्रिब्यूनल ने हालिया सुनवाई में साफ किया कि दीवार बनाने में नियमों की अनदेखी की गई। निर्माण से पूर्व कोई अनुमति भी नहीं ली गई। पार्क प्रशासन को दीवार हटाने का निर्देश दिया गया है।
गौहरी माफी गांव के ग्रामीणों की बाढ़ से सुरक्षा के नाम पर मार्च में सिंचाई विभाग की ओर से दीवार निर्माण का काम शुरू किया गया था। लेकिन निर्माण के लिए पार्क प्रशासन ने चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की अनुमति नहीं ली थी।
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खास बात यह थी कि यह दीवार जिस जगह बन रही थी, वह पार्क के हाथियों और बाघों के कॉरिडोर का हिस्सा है। दीवार बनने से कॉरिडोर बंद हो रहा था। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहे थे।
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पर्यावरण मंत्रालय ने भी माना
यह मामला सुप्रीम कोर्ट की इंपावर्ड कमेटी तक भी पहुंचा, लेकिन पार्क प्रशासन ने निर्माण जारी रखा। इस पर वन्यजीव प्रेमियों ने ग्रीन ट्रिब्यूनल से शिकायत की। ट्रिब्यूनल में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी माना कि यह दीवार अवैध है।
ट्रिब्यूनल ने ताजा सुनवाई में कड़ी टिप्पणी में पार्क प्रशासन के रवैये को नियमों को हवा में उड़ाना करार दिया है। कहा गया कि निर्माण के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सेक्शन 35 के तहत अनुमति ली जानी चाहिए थी।
ट्रिब्यूनल ने दीवार हटाने का निर्देश दिया है। कहा कि पार्क प्रशासन दोबारा पूरी प्रक्रिया और नियमों के तहत अनुमति लेकर निर्माण करा सकता है। मामले में ट्रिब्यूनल 23 सितंबर को अपना फैसला सुना सकता है, जिसमें वन महकमे के कुछ अधिकारी और कर्मचारी दोषी ठहराए जा सकते हैं।
पैसे की बर्बादी का कौन जिम्मेदार
वन्यजीव प्रेमी पार्क शुरुआत से इस दीवार का विरोध करते रहे, लेकिन पार्क प्रशासन मनमानी पर उतारू रहा। पहले ही कदम रोक लिए जाते तो ट्रिब्यूनल के दीवार हटाने के आदेश से बचा जा सकता था।
अब करीब पांच माह बाद ट्रिब्यूनल के फैसले तक दीवार का काफी लंबा हिस्सा बनाया जा चुका है, जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं। अब इसे तोड़ना होगा। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि आखिर सरकारी पैसे की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन होगा।
ट्रिब्यूनल का आदेश माना जाएगा। दीवार हटाने का आदेश दिया गया है तो इसे सम्मानजनक तौर पर स्वीकार करते हुए जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
- किशनचंद, डिप्टी डायरेक्टर, राजाजी पार्क