फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   himalaya diwas 2018 governments not serious to reserve himalaya

हिमालय दिवस 2018: हिमालय के संरक्षण को चाहिए हिमालय सा हौसला

Sun, 09 Sep 2018 09:39 AM IST
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 09 Sep 2018 09:39 AM IST
विज्ञापन
himalaya diwas 2018 governments not serious to reserve himalaya
himalaya

दशकों से हिमालय की चिंता तो होती रही है, लेकिन हिमालय के संरक्षण और उसे संवारने के लिए हिमालय सा हौसला कोई सरकार नहीं दिखा सकी।

विज्ञापन


हिमालयी राज्यों के लिए अलग मंत्रालय की मांग राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित हुई। सड़क से सदन तक उठी इस मांग पर नीतिगत सहमति के बावजूद केंद्र में बैठी सरकारों ने निर्णय लेने का साहस नहीं दिखाया। 
विज्ञापन


प्रचंड बहुमत की एनडीए सरकार से इस बार हिमालयी राज्यों के लिए अलग मंत्रालय या प्राधिकरण के बनने की उम्मीद जगी थी, मगर उत्तर भारत से लेकर उत्तर पूर्वी राज्यों में जड़े जमाने वाली सत्तारूढ़ भाजपा की पर्वतीय राज्यों की सरकारें भी केंद्रीय सत्ता पर दबाव बनाने नाकाम रही है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक इससे सहमत नहीं दिखते।
विज्ञापन
विज्ञापन


निशंक कहते हैं,‘केंद्र सरकार ने हिमालयी राज्यों के लिए हिमनद प्राधिकरण को मंजूरी दी। अलग विवि खोलने के लिए बजट में प्रावधान किया। वे स्वयं संसद में हिमालयी राज्यों के लिए अलग मंत्रालय की मांग को लेकर गैर सरकारी संकल्प लाए, जिस पर समूचे सदन ने चर्चा की और प्रस्ताव के समर्थन में सहमति जताई।’ लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के इन दावों से जुदा, ऐसे वक्त में जब उत्तराखंड और हिमाचल में भाजपा की सरकारें हैं, जम्मू-कश्मीर में उसका सियासी प्रभाव है और उत्तर-पूर्वी राज्यों में उसने पैंठ बनाई है, हिमालयी राज्यों के लिए अलग मंत्रालय की मांग पर फैसला न करना बड़ा प्रश्न है।

योजना आयोग भी कर चुका है सिफारिश

himalaya diwas 2018 governments not serious to reserve himalaya
himalaya

17 मार्च 1992 को तत्कालीन योजना आयोग में डॉ. जेएस कासिम की अध्यक्षता में एक विशेष दल गठित हुआ था। इस दल ने हिमालयी राज्यों का अध्ययन करने के बाद सिफारिश की कि अति संवेदनशील होने के कारण यहां एक हिमालय विकास प्राधिकरण बनना चाहिए। दल ने हिमालयी राज्यों के अलग मंत्रालय के गठन बनाए जाने के विकल्प पर भी विचार करने की सलाह दी।

हिमालय सिर्फ बर्फ की चोटियां नहीं
पर्यावरणविदें, प्रेमियों व समाजसेवियों का मानना है कि हिमालय की चिंता सिर्फ बर्फ से लकदक चोटियां, हिमनद और सदानीरा नदियां ही नहीं है। दरअसल, हिमालय की संपूर्णता उस समाज, संस्कृति और परंपराओं से है, जो यहां बड़ी आबादी के तौर पर वास करती है। उसका सबसे पहला प्रहरी और चिंतक यहां बसने वाला समाज भी है। उसकी चिंता किए बगैर हिमालय की चिंता बेमानी है। 

इसलिए चाहिए मंत्रालय या प्राधिकरण  
पिछड़े क्षेत्रों की पहचान कराना। उनका संपूर्ण संरक्षण एवं समग्र विकास करना। विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराना। सीमा पार से हो रही घुसपैठ को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय करना।पर्यावरण और पारिस्थितिकी से संतुलन बैठाते हुए अवस्थापना विकास करना। विकास परियोजनाओं के लिए संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को अनुशंसा करना। हिमालयी संपदा आधारित उद्योगों की स्थापना करना और पलायन रोकना।

तथ्यों की नजर में हिमालय 
हिमालय क्षेत्र में 11 राज्य हैं, जिनमें उत्तराखंड, हिमाचल, असम, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा हैं। 
- इनका पूरा क्षेत्रफ ल 5 लाख 93 हजार वर्ग किमी है 
- 2011 की जनगणना के अनुसार, इसकी 7 करोड़ 51 लाख 58 हजार आबादी है 
- 52 जिलों का वाले हिमालय के 40 लोकसभा सदस्य हैं 
- सालाना 10 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी एशिया महाद्वीप को देता है
 - उत्तर भारत की नदियों में सालाना 650 घन मीटर पानी हिमालय से आता है
- देश की 50 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाता है
 - भारत में हिमालय का 2500 किमी का क्षेत्र है, जो 400 किमी तक फैला है

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed