बारिश शुरू होते ही यहां घर छोड़ देते हैं लोग
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बारिश शुरू होते ही उत्तराखंड के द्वारीखाल ब्लाक में परसूली गांव के लोग खौफजदा हो जाते हैं। चार दिन पहले ये लोग गांव में ऐसा मंजर देख चुके हैं, जिसे याद कर उनके रोंगटे खडे़ हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बादल फटने के बाद जिस तरह से मलबे की बाढ़ नीचे की ओर आया, यदि वह घनी आबादी का रुख करता तो त्रासदी इससे भयंकर होती।
परसूली के प्रधान सुरेश सिंह नेगी बताते हैं कि क्षेत्र में घटना से तीन दिन पहले से लगातार बारिश हो रही थी। वह अपने वृद्ध पिता के उपचार के सिलसिले में कोटद्वार थे। दो दिन हाईवे बंद होने के कारण वहीं फंस रह गए।
मानों जमीन से ज्वालामुखी फूट पड़ा हो
17 अगस्त की सुबह गांव पहुंचे तो भूगोल ही बदला हुआ था। उन्होंने बताया कि गांव की घनी आबादी से थोड़ा हटकर मानसिंह नेगी का मकान था।
गांव को देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि यहां भी कभी त्रासदी जन्म ले सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही गांव के ऊपर बादल फटा, वैसे ही मानों जमीन से ज्वालामुखी फूट पड़ा हो।
मलबे ने गांव की तरफ रुख किया तो सतेसिंह ने भुंद्री देवी के घर की ओर दौड़ लगाई। वह जोर-जोर से चिल्ला रहा था कि घर से निकलो, बाहर आओ। उनकी बहू धूपा देवी आवाज सुनकर बाहर निकली।
मलबे में दफन हो गया परिवार
धूपा तो बच गई मगर, उन्हें बचाने गए सते सिंह और घर के अंदर मौजूद मां-बेटे भुंद्रा देवी और सोबन सिंह मलबे के साथ दफन हो गए। धूपा देवी को लोगों ने बचा लिया था।
15 अगस्त की त्रासदी ने जहां गांव की तीन जिंदगी लील ली। वहीं भूस्खलन का खतरा हमेशा के लिए हो गया है। गांव के ऊपर से पानी निकलने का सिलसिला जारी है।
बारिश देखते ही लोग दहशत में हो जाते हैं। मलबे में दबे आखिरी शव के निकाले जाने के बाद जहां एनडीआरएफ की टीम भी लौट गई है, वहीं गांव में अजीब सा सन्नाटा पसरा है।