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Politics: 21 साल से हो रही इस मुद्दे पर सियासत, हरीश रावत बोले-हम चूक गए, धामी के पास सिकंदर बनने का मौका

Thu, 01 Sep 2022 02:26 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 01 Sep 2022 02:26 PM IST
सार

आए दिन अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अब सीएम धामी को सुझाव दिया है। प्रदेश के राजनीति में इन दिनों एक और मुद्दे के चलते सियासत गरमा गई है। पूर्व सीएम हरीश रावत इस मुद्दे को खूब उछाल रहे हैं। 

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Harish Rawat statement about CM Dhami politics formation of new districts
हरीश रावत और पुष्कर सिंह धामी - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

नए जिलों के गठन को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद प्रदेश में फिर से सियासत गरम हो गई है। 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार डीडीहाट, यमुनोत्री, कोटद्वार और रानीखेत को जिला बनाने का शासनादेश तक जारी कर चुकी है।

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कांग्रेस की सरकार में भी नए जिलों के गठन का मामला उठा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बाकायदा इसे घोषणापत्र में शामिल किया था। हालांकि 21 साल बाद भी आज तक एक नया जिला नहीं बन पाया। वर्तमान में उत्तराखंड दो मंडल, 13, जिले, 110 तहसीलें और 18 उप तहसीलें हैं। 
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इन्हें जिले बनाने की मांग
कोटद्वार : 15 विकासखंडों वाले पौड़ी जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 60 के दशक से कोटद्वार को जिला बनाने की मांग चली आ रही है। करीब साढ़े तीन लाख की आबादी और 1,42,578 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर जिला बनाने का प्रस्ताव था। इसमें सतपुली, धुमाकोट, यमकेश्वर और लैंसडौन को शामिल किया जाना था। 
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यमुनोत्री: यमुना घाटी को अलग जिला बनाने की मांग 1971 से की जा रही है। उस समय पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी उत्तरकाशी दौरे पर आई थीं। 2,83,898 हेक्टेयर क्षेत्रफल करीब डेढ़ लाख की आबादी पर यमुनोत्री को जिला बनाने का प्रस्ताव था, जिसमें बड़कोट, पुरोला और मोरी को शामिल किया जाना था। 

रानीखेत : रानीखेत जिले की मांग 1955 से उठ रही है। रानीखेत को ब्रिटिश शासक ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना चाहते थे। यहां नगर पालिका भी नहीं है। 1,39,686 हेक्टेयर क्षेत्रफल और करीब साढ़े तीन लाख की आबादी पर जिला बनना था, जिसमें रानीखेत, सल्ट भिकियासैंण, द्वाराहाट, चौखुटिया और स्याल्दे शामिल होने थे। 

डीडीहाट : डीडीहाट जिले की मांग वर्ष 1960 से उठ रही है। वर्ष 2005 में आंदोलन हुआ। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत अपने मुख्यमंत्रित्व काल में घोषणा भी कर चुके हैं। 81304 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर करीब पौने दो लाख आबादी पर जिला बनाया जाना था। इसमें डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, थल, बंगापानी को शामिल करने का प्रस्ताव था। 

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हम चूक गए, धामी के पास सिकंदर बनने का मौका : हरीश

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी नए जिलों के गठन को लेकर वाकई गंभीर हैं तो बधाई के पात्र हैं, नहीं तो यह भर्ती घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए एक शिगूफा है। रावत ने कहा कि हमारी सरकार ने 11 जिलों के प्रस्ताव बनाकर रखे हैं। तहसीलों और पटवारी हलकों के प्रस्ताव भी तैयार हैं। हम चूक गए, लेकिन धामी के सामने सिकंदर बनने का मौका है।

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