{"_id":"5f79630535af5d7117523bd5","slug":"haridwar-bone-ashes-of-4-896-unclaimed-people-immersed-in-ganga","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरिद्वार: 4,896 लावारिस लोगों की अस्थियां गंगा में विसर्जित कर दिलाया मोक्ष ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरिद्वार: 4,896 लावारिस लोगों की अस्थियां गंगा में विसर्जित कर दिलाया मोक्ष
Sun, 04 Oct 2020 11:25 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 04 Oct 2020 11:25 AM IST
विज्ञापन
अस्थि विसर्जन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री देवोत्थान सेवा समिति के सदस्यों ने लावारिस लोगों की अस्थियों को कनखल के सतीघाट पर मां गंगा में विसर्जित कर मोक्ष दिलाया। अस्थियों को 100 किलो दूध की धारा के साथ वैदिक रीति और मंत्रोच्चारण के साथ गंगा में विसर्जित किया गया।
विज्ञापन
शनिवार को श्री देवोत्थान सेवा समिति के सदस्यों ने यात्रा संयोजक विजय शर्मा के नेतृत्व कनखल के सतीघाट पर गंगा में लावारिस लोगों की अस्थियों को विसर्जित कर मोक्ष दिलाया। समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने बताया कि 19वीं अस्थि कलश विसर्जन यात्रा में 4,896 लावारिस लोगों की अस्थियां को गंगा में विसर्जित किया।
विज्ञापन
विजय शर्मा ने बताया कि श्री देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र की प्रेरणा से पंकज आंगरा के नेतृत्व में युवा टीम के नमन शर्मा, रिदम कुमार, उत्कर्ष कुमार, गोविंद तेवतिया, दिशांत, नकुल यादव, हर्ष कौशिक, कप्तान सिंह, नीरज, कृष्णा, संजय वालिया, दिव्यांशु, अरुण सिंह, गोपाल वर्मा, दिनेश भारद्वाज, आशीष कश्यप, शारदा प्रषाद, राजकुमार, किरण दीप कौर ने दिल्ली एनसीआर से एकत्रित 4896 अस्थियों की सफाई कर उनमें से राख हटाकर अस्थियों को चुना।
विज्ञापन
कनखल के सतीघाट पर जितेंद्र शास्त्री, नितिन माणा ने वैदिक रीति रिवाज से कार्यक्रम को संपन्न कराया। इस मौके पर रविंद्र गोयल, डॉ. विशाल गर्ग, नरोत्तम शर्मा, निष्काम सेवा ट्रस्ट, अग्रवाल सेवा सदन, महामाई सेवा न्यास, शिवशंकर कांवड़ सेवा समिति, महामाई सेवा न्यास सिद्धदाता मानव सेवा समिति के सदस्य मौजूद रहे।