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हल्द्वानी में न स्टेडियम तैयार न खेल गांव का पता

Wed, 05 Jul 2017 12:08 PM IST
हरीश पांडे / अमर उजाला, हल्द्वानी
हरीश पांडे / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Wed, 05 Jul 2017 12:08 PM IST
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haldwani stadium not prepare for 2018 national game
हल्द्वानी स्टेडियम, हरीश रावत - फोटो : file photo

उत्तराखंड में 2018 में राष्ट्रीय खेल होने हैं। इसे लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना खेल गांव विकसित करे सरकार राष्ट्रीय खेल में आने वाले हजारों खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को कहां ठहराएगी।

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खेल गांव बनाने के लिए हल्द्वानी में सिडकुल और देहरादून में मसूरी देहरादून डेवलॉपमेंट ऑथरिटी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन एक साल बीतने के बाद न तो खेल गांव बनाने के लिए अभी तक जीओ जारी किया गया, न ही बजट जारी किया गया।
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राष्ट्रीय खिलाड़ियों की तैयारी के लिए एक साल से भी कम समय रह गया है तैयारियों के लिए। जिस गति से इंडोर स्टेडियम से लेकर अन्य  तैयारियां हो रही हैं, लगता नहीं कि यह छह-सात महीने में भी स्टेडियम तैयार हो पाएगा। ऐसे में खिलाड़ी प्रशिक्षण कहां लेंगे।
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इधर खेल गांव बनाने की तैयारियां भी अधर में ही नजर आ रही हैं, ऐसे में राष्ट्रीय खेल में भाग लेने वाले खिलाड़ी कहां रुकेंगे इस पर संशय बना हुआ है। सिडकुल के एमडी राजेश कुमार ने बताया कि खेल गांव को बनाने के लिए मीटिंग में प्रस्ताव आया था। लेकिन उसके बाद न जीओ जारी हुआ, न ही पैसा मिला। खेल गांव बनाने के लिए करोड़ों रुपये चाहिए। सिडकुल इतना पैसा खुद नहीं लगा सकता है। 

किराए के खेल गांव में खिलाड़ियों को रोकने की है योजना
खेल गांव को लेकर देहरादून में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में खेल गांव पर भी चर्चा हुई। सूत्रों की माने तो भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता ने खेल गांव नहीं बनने पर आपत्ति जताई थी। आपत्ति के बाद खेल विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय खेल में आने वाले खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को ठहराने के लिए बिल्डरों से बात कर योजना बनाने का आश्वासन दिया।

सूत्रों के मुताबिक ओलंपिक संघ के महासचिव मेहता ने खेल विभाग के अधिकारियों से पूरा प्रस्ताव जल्द बनाकर भेजने की बात कही। साथ ही संघ की एक तकनीकी टीम भी इसकी जांच करेगी। उपनिदेशक खेल अजय अग्रवाल ने कहा कि खेल गांव को लेकर निजी बिल्डरों से संपर्क  किया जा रहा है। वहीं अस्थाई खेल गांव बनाने पर भी विचार चल रहा है। ध्यान रहे कि दो महीने तो बारिश ही होगी, रेता बजरी के दाम भी आसमान छू रहे हैं, ऐसे में कोई बिल्डर निर्माण कार्य में आसानी से हाथ डालेगा । बचे चार माह से भी कम समय में निर्माण कार्य होना असंभव ही नजर आता है।  

राष्ट्रीय खेल में होंगे 36 खेल
अक्तूबर-नवंबर 2018 में प्रस्तावित राष्ट्रीय खेल की अभी तिथि निर्धारित नहीं हुई है। 20-25 दिन तक होने वाले राष्ट्रीय खेल में 36 गेम्स होंगे। देहरादून में एथलेटिक्स, बास्केटबाल, वालीबाल, हॉकी आदि खेल होंगे। हरिद्वार में नया एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड बनाया जा रहा है। बाकी खेल हल्द्वानी स्टेडियम में होने हैं। वाटर स्पोर्ट्स की जहां तक बात है वो टिहरी झील और नैनीताल झील में कराए जाने की बात है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ में भी गेम्स होने, लेकिन वहां भी तैयारियां आधी अधूरी ही हैं, टेनिस मैच देहरादून परेड ग्राउंड में होने हैं, लेकिन वहां जो कोर्ट बना है उसमें दर्शकों के बैठने की क्षमता है ही नहीं।

कछुआ गति से जारी है निर्माण 
गौलापार में बन रहे अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण में अभी बहुत काम होना बाकी है, जबकि यहां बनने वाले एथलेटिक स्टेडियम को अभी तक जमीन भी नहीं मिल पाई है। इसके अलावा कुछ मैच हल्द्वानी मिनी स्टेडियम में भी होने हैं लेकिन इसका निर्माण भी कछुआ गति से हो रहा है। यहां अब तक 68 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है जबकि इसे जून में पूरा हो जाना था। यह स्टेडियम 14.35 करोड़ रुपये से बनना था। शासन की ओर से कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम को 12.12 करोड़ रुपये आवंटित भी हो गए। सवाल उठता है कि जब स्टेडियम ही नहीं तैयार हैं तो विदेशी कोच ट्रेनिंग कहां देंगे। 


गोला पार स्टेडियम 
स्वीमिंग पुल      - ढांचा तैयार 
इंडोर स्टेडियम     - ढांचा तैयार 
वास्केटबाल कोर्ट - ढांचा तैयार 
जिमानास्टिक - ढांचा तैयार 
बॉक्सिंग रिंग - ढांचा तैयार 

हल्द्वानी मिनी स्टेडियम
बैडमिंटन के चार कोर्ट - ढांचा तैयार 
टेबल टेनिस के चार कोर्ट - ढांचा तैयार 
जिम - ढांचा तैयार 
स्क्वैश के तीन कोर्ट - एक तैयार     
छात्रावास के 12 कमरे - फिनिशिंग शेष  
एक हजार सीट का पैवेलियन -    काम जारी 

निर्माणदायी संस्था की ओर से कार्य पूरा नहीं करने के कारण खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 2018 में राष्ट्रीय खेल होने हैं, लेकिन खिलाड़ियों का प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा है।
- अख्तर अली, जिला क्रीड़ा अधिकारी नैनीताल

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