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हल्द्वानी: एमबी के टूट गए सपने, नैक में मिला सी ग्रेड, अपील करेगा एमबीपीजी

Mon, 19 Aug 2019 03:13 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal नवीन सक्सेना, अमर उजाला, हल्द्वानी
नवीन सक्सेना, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 19 Aug 2019 03:13 PM IST
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haldwani MBPG get C grade in NAAC
NAAC

एमबीपीजी कॉलेज को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के निरीक्षण में सी-ग्रेड मिला है। नैक की रिपोर्ट एमबीपीजी कॉलेज प्रशासन को प्राप्त हो गई है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अभी मूल्यांकन रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा। इसके बाद कॉलेज प्रशासन परिषद में अपील करेंगे, इसके लिये एक महीने का समय है।

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नैक की टीम ने पांच और छह अगस्त को एमबीपीजी कॉलेज का निरीक्षण किया था। कॉलेज प्रशासन को उम्मीद थी कि इस बार व्यवस्थाओं में सुधार और अच्छे परीक्षा परिणामों के चलते उनको ए ग्रेड मिलेगा लेकिन, उसे सी ग्रेड मिला है। इससे कालेज प्रबंधन को झटका लगा है। नैक निरीक्षण समिति के संयोजक डॉ. बीआर पंत कहते हैं कि हमने ए ग्रेड हासिल करने के लिए तैयारियां की थी। कॉलेज में शोधार्थियों की  संख्या के साथ ही परीक्षा परिणाम लाइब्रेरी कंप्यूटर आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई थी। कॉलेज को सी ग्रेड क्यों मिला है, इसका अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही नैक में अपील करेंगे।
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ये रही कमियां

- एमबीपीजी कॉलेज में छात्र और छात्राओं का हॉस्टल न होना
- खेल का मैदान न होना 
- विद्यार्थियों की संख्या की तुलना में संसाधनों की कमी
-ऑफिस रिकार्ड का उचित प्रबंध न होना
- नैक की टीम ने करीब चार छात्रों के पास कालेज के बारे में फीड बैक लेने के लिए मेल भेजी गई थी, उस पर रिस्पांस ने आना।

मुझे कोई नहीं जानकारी:  डॉ. खंडूरी
प्राचार्य डॉ बीना खंडूरी का कहना है कि नैक के निरीक्षण में कॉलेज को कौन सी ग्रेडिंग मिली है, मुझे अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है। वहीं, नैक के निरीक्षण के दौरान प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. जीएस बिष्ट का कहना है कि कॉलेज को ए ग्रेड मिले, इसके लिए हर संभव प्रयास किए गए थे पर अफसोस है कि अपेक्षित परिणाम नहीं आया। 

लाखों रुपये खर्च किए गए
नैक के निरीक्षण को लेकर के कॉलेज प्रशासन की ओर से परिसर में साज सज्जा कार्य और रंग रोगन समेत कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने को लेकर दस लाख अधिक का खर्च किया गया। साथ ही क्लासरूम को स्मार्ट बनाने समेत अन्य कार्यों के लिए डीपीआर उच्च शिक्षा निदेशालय को काफी समय पहले भेजी थी लेकिन निदेशालय से डीपीआर पर फैसला नहीं हो सका। उच्च शिक्षा निदेशालय और शासन का अपेक्षित सहयोग न मिलना भी एक कारण माना जा रहा है।

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