मोदी के 'मॉडल' में देशसेवा का जज्बा नहीं
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गुजरात के विकास माडल में कार्पोरेट सेक्टर की चमक युवाओं पर इस कदर हावी है कि राज्य से केवल एक युवा भारतीय सेना में अफसर बनेंगे।
जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से गुजरात देश के बड़े राज्यों में शामिल हैं, लेकिन वहां सेना का आकर्षण न के बराबर है।
वहीं गुजरात के सटे पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान के युवाओं की खासी तादात सेना में अफसर बनती है।
राजनीतिक गलियारों से लेकर संसद तक सुर्खियों में रहे गुजरात के विकास माडल में युवाओं की पसंद सेना में सेवाएं देना नहीं है।
गुजरात से इक्का दुक्का युवा ही भारतीय सैन्य अकादमी में अफसर बनने के लिए पहुंते हैं। वर्ष 2012 में हुई दो पीओपी में मात्र तीन युवा पासआउट हुए।
सीमा के पास, फिर भी सेना से दूरी
यह माना जाता रहा है कि सीमावर्ती राज्यों के युवाओं में सेना के प्रति अधिक आकर्षण होता है, लेकिन गुजरात इस श्रेणी में फिट नहीं बैठता। राज्य का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान सीमा से लगा हुआ है बावजूद इसके युवा सेना को पहली पसंद नहीं है।
14 जून को आईएमए की पासिंग आउट परेड में गुजरात का एक युवक भारतीय सेना में अफसर बनेगा। वहीं पड़ोसी महाराष्ट्र से 32, मध्य प्रदेश से 30, राजस्थान से 38 अफसर सेना को मिलेंगे।
अफसरों की कम संख्या वाले राज्य में गुजरात के अलावा छतीसगढ़ और असम हैं जहां से दो-दो अफसर है। गोवा और त्रिपुरा से कोई अफसर सेना को नहीं मिला है।