साढ़े चार बजे लगा राष्ट्रपति शासन, महामहिम फिर बने 'सुपर पॉवर'
- सर्वोच्च न्यायालय के स्टे के बाद परामर्शदात्री परिषद भी फिर से वजूद में आई
- अटार्नी जनरल ने राजभवन को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से अवगत कराया
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उच्च न्यायालय नैनीताल के सरकार को बहाल करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राज्य में पुन: राष्ट्रपति शासन की बहाली हो गई है। दोपहर बाद करीब साढ़े चार बजे देश के अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने राजभवन को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से अवगत कराया।
इसके तत्काल बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। जिस तरह से हरीश रावत के पुन: मुख्यमंत्री बनने का कोई औपचारिक आदेश नहीं हुआ, उसी तरह से आज पुन: राष्ट्रपति शासन लागू होने का भी कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया। राज्यपाल की उच्चाधिकार प्राप्त परामर्शदात्री परिषद अस्तित्व में आ गई है और चार महीने का लेखानुदान पुन: वजूद में आ गया है।
विगत 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद केंद्र ने दैनिक कामकाज सुचारु करने के लिए राज्यपाल के दो एडवाइजर नियुक्त किए थे।
परामर्शदात्री समिति को मिली कैबिनेट की शक्तियां
इसके अलावा एक परामर्शदात्री परिषद का गठन भी किया था, जिसे कैबिनेट के अधिकार प्राप्त थे। लेकिन 21 अप्रैल को उच्च न्यायालय के फैसले के बाद राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले की स्थिति बहाल हो जाने के बाद सारी व्यवस्थाएं बदल गई थीं।
22 अप्रैल को जैसे ही सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के राज्य में राष्ट्रपति शासन रोकने और हरीश रावत सरकार को बहाल करने के फैसले पर रोक लगाई तो राज्यपाल की सलाहकार परिषद समेत तमाम वही सिस्टम लागू हो गया।
बृहस्पतिवार को लागू किया गया 18 मार्च का वित्त विनियोग विधेयक भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के साथ स्टे हो गया। अब सारे खर्चे राष्ट्रपति द्वारा मंजूर किए गए चार महीने के लेखानुदान से ही होंगे।