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बकाया भुगतान के लिए बिकेगी आईडीपीएल की जमीन, जल्द होगी निलाम
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 12 Apr 2017 01:26 AM IST
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कर्मचारियों के बकाये का भुगतान करने के लिए आईडीपीएल की भूमि बेची जाएगी। केंद्र सरकार के मालिकाना हक वाली ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की उतनी ही भूमि सरकारी एजेंसियों, उपक्रमों को बेची जाएगी, जिससे सारे दायित्व पूरे हो जाएं। भूमि की बिक्री के संबंध में कंपनी के एमडी की ओर से शासन को पत्र भेजा गया है। इससे राजस्व विभाग और सर्किल के वन संरक्षक को भी अवगत कराया गया है।
एंटी बायोटिक दवाएं बनाने वाली आईडीपीएल कंपनी सालों पहले बंद हो चुकी है। यह सेंट्रल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स मिनिस्ट्री का उपक्रम रहा है। वर्ष 1962 में यहां की 899.53 एकड़ भूमि 99 साल के पट्टे पर दी गई थी। प्रत्येक 30 साल में डीड के नवीनीकरण का प्रावधान भी रखा गया। बाद में 65.652 एकड़ भूमि यूपी सरकार ने ले ली और आईडीपीएल के कब्जे में 833.878 एकड़ भूमि ही रही।
इसका उपयोग दवा बनाने और कंपनी स्टाफ के आवास बनाने तक सीमित कर दिया गया। बाद में आईडीपीएल बंद हो गई। केंद्रीय कैबिनेट ने फैसला दिया है कि कर्मचारियों के बकाये के भुगतान के लिए कंपनी के कब्जे वाली अतिरिक्त (सरप्लस) भूमि बेची जा सकती है। लेकिन यह भूमि नीलामी के जरिये ही सरकारी एजेंसियों को बेची जाएगी। भूमि स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है। आईडीपीएल के चेयरमैन ने केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय के मद्देनजर मामले के निस्तारण की उत्तराखंड सरकार से मांग की है।
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एंटी बायोटिक दवाएं बनाने वाली आईडीपीएल कंपनी सालों पहले बंद हो चुकी है। यह सेंट्रल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स मिनिस्ट्री का उपक्रम रहा है। वर्ष 1962 में यहां की 899.53 एकड़ भूमि 99 साल के पट्टे पर दी गई थी। प्रत्येक 30 साल में डीड के नवीनीकरण का प्रावधान भी रखा गया। बाद में 65.652 एकड़ भूमि यूपी सरकार ने ले ली और आईडीपीएल के कब्जे में 833.878 एकड़ भूमि ही रही।
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इसका उपयोग दवा बनाने और कंपनी स्टाफ के आवास बनाने तक सीमित कर दिया गया। बाद में आईडीपीएल बंद हो गई। केंद्रीय कैबिनेट ने फैसला दिया है कि कर्मचारियों के बकाये के भुगतान के लिए कंपनी के कब्जे वाली अतिरिक्त (सरप्लस) भूमि बेची जा सकती है। लेकिन यह भूमि नीलामी के जरिये ही सरकारी एजेंसियों को बेची जाएगी। भूमि स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है। आईडीपीएल के चेयरमैन ने केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय के मद्देनजर मामले के निस्तारण की उत्तराखंड सरकार से मांग की है।
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