खुशखबरी: उत्तराखंड में अब ब्रांडेड यूनिफॉर्म पहनेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे
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सरकारी स्कूलों के बच्चे अब रेमंड और ओसीएम कंपनी की ड्रेस पहनेंगे। ड्रेस का आधा पैसा राज्य सरकार देगी, जबकि आधा पैसा दोनों कंपनियां अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी (सीएसआर) फंड से देंगी। ड्रेस की धनराशि के लिए राज्य सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर एकमुश्त बजट देने का अनुरोध करेगी।
सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के लिए तहत केंद्र सरकार ड्रेस का खर्च देती है। इसके अलावा निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों को भी ड्रेस का पैसा प्रतिपूर्ति व्यय के रूप में दिया जाता है।
यह पैसा स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के खाते में डाला जाता है। जहां से यह बच्चों में बांट दिया जाता है, लेकिन अब सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इस बजट को एकमुश्त विभाग को जारी करने का अनुरोध करेगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बताया कि अभी ड्रेस के लिए 400 रुपये प्रति छात्र की दर से भुगतान किया जा रहा है। इस धनराशि में दो ड्रेस बनाना खासा मुश्किल है।
एकरूपता भी आएगी
ऐसे में राज्य सरकार ने रेमंड और ओसीएम कंपनी से बच्चों को ड्रेस दिलाने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार प्रति ड्रेस केंद्र से मिलने वाली धनराशि सीधे कंपनी को देगी। शेष धनराशि कंपनी अपने सीएसआर फंड से उपलब्ध कराएगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इससे बच्चों को बेहतर क्वालिटी के कपड़े मिलेंगे।
एकरूपता भी आएगी
अभी सरकारी स्कूलों में बच्चों की ड्रेस का रंग तय है, लेकिन कई बार बच्चे मिलते-जुलते रंगों की ड्रेस खरीद लेते हैं। इससे एकरूपता नहीं रहती है। सरकार के स्तर से ड्रेस उपलब्ध कराई जाएगी तो इसमें एकरूपता भी रहेगी।
अन्य कंपनियों से भी चल रही बातचीत
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बताया कि अन्य कंपनियों से भी ड्रेस उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि इसी माह कुछ अन्य कंपनियों से भी अंतिम बातचीत हो जाएगी। उसके बाद ड्रेस तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति को ड्रेस से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।