सख्ती बेअसर: अप्रैल से आ गई जुलाई, बिना किताब कैसे हो पढ़ाई? अधिकारियों पर नकेल कसने के बाद भी जानें क्या हाल
सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को किताबों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकारियों की ढिलाई प्रदेश सरकार की कक्षा एक से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें दिए जाने की योजना पर पानी फेर रही है।
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हर बार की तरह इस बार भी छात्र-छात्राओं को सरकार की ओर से मिलने वालीं मुफ्त किताबें तय समय पर नहीं मिलीं। छह जुलाई से स्कूल खुलेंगे, लेकिन बच्चे बिना किताबों के ही स्कूल जाएंगे। यह हाल तब है जब हाल ही में शासन ने पुस्तक वितरण के जिम्मेदारों की नकेल कसी थी।
पुस्तक वितरण पूरा होने तक उनका वेतन रोकने के आदेश भी जारी किए थे। इसके बावजूद छात्र-छात्राओं को किताबों का इंतजार है। वहीं अधिकारियों की ढिलाई प्रदेश सरकार की कक्षा एक से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें दिए जाने की योजना पर पानी फेर रही है।
अटल उत्कृष्ट स्कूलों के छात्रों के पास भी किताबें नहीं
प्रदेश सरकार की ओर से अटल उत्कृष्ट स्कूलों को बड़ी उपलब्धी बताया जाता रहा है, लेकिन देहरादून जिले में इन स्कूलों के 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए गणित और सामाजिक विज्ञान की अंग्रेजी की किताबें नहीं पहुंचीं। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पढ़ाया जाना है।
अशासकीय स्कूलों की अनदेखी
उत्तराखंड प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय महामंत्री अवधेश कुमार कौशिक के मुताबिक सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से 12 वीं तक के छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें दी जा रही हैं, लेकिन अशासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को केवल कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को मुफ्त किताबें दी जा रही हैं, जबकि 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को किताबें नहीं दी जा रही हैं।
मुफ्त किताबों की शिक्षा महानिदेशक लगातार समीक्षा कर रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि स्कूल खुलते ही सभी छात्र-छात्राओं तक किताबें पहुंच चुकी हों। -आरके कुंवर, शिक्षा महानिदेशक
चंपावत: तीन प्रतिशत छात्रों को बंटनी हैं नि:शुल्क किताबें
चंपावत जिले में 97 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राओं को निशुल्क पुस्तकें बंट गईं हैं। सीईओ जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि बेसिक और माध्यमिक कक्षाओं की विभिन्न विषयों की 2.45 लाख पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है, लेकिन इस शिक्षा सत्र में नए प्रवेशार्थियों सहित कुछ छात्रों को अभी पुस्तकें नहीं दी जा सकी हैं। बेसिक में 1414, माध्यमिक में 2949 किताबों की मांग की गई है। छह जुलाई को स्कूल खुलने के एक हफ्ते के भीतर पुस्तकें पहुंच जाएंगी।
बागेश्वर: सभी कक्षाओं में बंट गई किताबें
बागेश्वर जिले में सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से कक्षा बारह तक के विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क पुस्तकें वितरित हो गई हैं। मुख्य शिक्षाधिकारी गजेंद्र सिंह सौन ने बताया कि जिले में करीब 1.30 लाख पुस्तकें कक्षा एक से आठ तक और 1.20 लाख पुस्तकें कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को वितरित की जानी थीं। सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित कर दी गई हैं।ऊधमसिंह नगर: नहीं मिलीं सभी विषयों की किताबें
रुद्रपुर जिले में कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को पुस्तकें मिल चुकी हैं, लेकिन कुछ विषय ऐसे हैं जिनकी किताबें अभी एससीईआरटी की ओर से नहीं पहुंची हैं। इन किताबों के जुलाई में मिलने की संभावना है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के लिए उपलब्ध सभी किताबों को वितरित कर दिया है जबकि इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान आदि की किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिले में वर्तमान में 785 प्राथमिक व 200 जूनियर हाईस्कूल हैं। 58 इंटर कॉलेज और 66 हाईस्कूल हैं। डीईओ बेसिक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जुलाई तक शेेष विषयों की किताबें मिलते ही उन्हें बांट दिया जाएगा। संवादनैनीताल: 95 फीसदी बच्चों को किताबें बांटने का दावा
नैनीताल में शिक्षा विभाग ने नैनीताल जिले में पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के लगभग 95 फीसदी बच्चों को अलग-अलग विषयों की किताबें वितरित कर दी हैं। कुछ विषय की किताबें कम पड़ रही हैं, उनकी पूर्ति के लिए विभागीय अधिकारी अन्य जिलों के संपर्क में हैं। जिला शिक्षा अधिकारी केएस रावत ने बताया कि नैनीताल जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक लगभग 39 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं जबकि नौवीं से 12वीं तक छात्रसंख्या 33 हजार के करीब है। उन्होंने बताया कि अधिकतर बच्चों को किताबें वितरित करा दी हैं। 12वीं कक्षा में अर्थशास्त्र की किताबें कम पड़ गई हैं। इसके लिए डिमांड की गई है। 11वीं कक्षा में अभी दाखिले नहीं हुए हैं। जुलाई में भी कई कक्षाओं में नए पंजीकरण होते हैं। इसे देखते हुए कुछ पुस्तकें अभी स्टॉक में रखी गई हैं।अल्मोड़ा: स्कूलों में बच्चों को किताबें बांटने का दावा
अल्मोड़ा जिले के सरकारी, सहायता प्राप्त, अशासकीय स्कूलों में कक्षा एक से 12वीं के छात्र-छात्राओं को समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत मुफ्त किताबें पहुंचा दी गई हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र भट्ट ने बताया कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में छात्र-छात्राओं को पुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया था। जिले के सभी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को पुस्तकें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में किताबें न मिलने की किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है।
पिथौरागढ़: 99 फीसदी किताबें बंटी
पिथौरागढ़ जिले के सभी सरकारी स्कूलों 99 फीसदी किताबें बांटी जा चुकी हैं। डीईओ माध्यमिक हवलदार प्रसाद ने बताया कि जिले में 4.38 लाख किताबें बांटी जानी थी जिसमें प्राथमिक स्तर पर 2.40 और बेसिक की 1.98 लाख किताबें बांटी जानी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्कूल बंद हैं। शिक्षकों को किताबें सीआरसी के माध्यम से बच्चों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बची हुई एक फीसदी किताबें ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी वितरित करने का प्रयास रहेगा।
हरिद्वार: साढ़े छह हजार बच्चों को नहीं मिली किताबें
हरिद्वार में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगभग एक लाख 55 हजार है, लेकिन जनपद के लगभग साढ़े छह हजार बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी हैं। इसकी वजह से अप्रैल से शुरू हुए सत्र में ये बच्चे पहले ही बिना किताबों के स्कूल गए। वहीं, अब छह जुलाई से खुलने वाले स्कूलों के लिए भी किताबें मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) एसपी सेमवाल ने बताया कि स्कूलवार किताबों की डिमांड समस्त सीआरसी से मांगी गई है। जो आजकल में ही आ जाएगी। किताबों के लिए मांग पत्र शासन को भेज दिया जाएगा।