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सख्ती बेअसर: अप्रैल से आ गई जुलाई, बिना किताब कैसे हो पढ़ाई? अधिकारियों पर नकेल कसने के बाद भी जानें क्या हाल

Sun, 03 Jul 2022 04:02 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 03 Jul 2022 04:02 PM IST
सार

 सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को किताबों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकारियों की ढिलाई प्रदेश सरकार की कक्षा एक से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें दिए जाने की योजना पर पानी फेर रही है।

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Government school education, July has come from April, but children did not get books
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर बार की तरह इस बार भी छात्र-छात्राओं को सरकार की ओर से मिलने वालीं मुफ्त किताबें तय समय पर नहीं मिलीं। छह जुलाई से स्कूल खुलेंगे, लेकिन बच्चे बिना किताबों के ही स्कूल जाएंगे। यह हाल तब है जब हाल ही में शासन ने पुस्तक वितरण के जिम्मेदारों की नकेल कसी थी।

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पुस्तक वितरण पूरा होने तक उनका वेतन रोकने के आदेश भी जारी किए थे। इसके बावजूद छात्र-छात्राओं को किताबों का इंतजार है। वहीं अधिकारियों की ढिलाई प्रदेश सरकार की कक्षा एक से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें दिए जाने की योजना पर पानी फेर रही है।

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अटल उत्कृष्ट स्कूलों के छात्रों के पास भी किताबें नहीं

प्रदेश सरकार की ओर से अटल उत्कृष्ट स्कूलों को बड़ी उपलब्धी बताया जाता रहा है, लेकिन देहरादून जिले में इन स्कूलों के 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए गणित और सामाजिक विज्ञान की अंग्रेजी की किताबें नहीं पहुंचीं। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पढ़ाया जाना है।

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अशासकीय स्कूलों की अनदेखी

उत्तराखंड प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय महामंत्री अवधेश कुमार कौशिक के मुताबिक सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से 12 वीं तक के छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें दी जा रही हैं, लेकिन अशासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को केवल कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को मुफ्त किताबें दी जा रही हैं, जबकि 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को किताबें नहीं दी जा रही हैं।

मुफ्त किताबों की शिक्षा महानिदेशक लगातार समीक्षा कर रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि स्कूल खुलते ही सभी छात्र-छात्राओं तक किताबें पहुंच चुकी हों। -आरके कुंवर, शिक्षा महानिदेशक

चंपावत: तीन प्रतिशत छात्रों को बंटनी हैं नि:शुल्क किताबें

चंपावत जिले में 97 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राओं को निशुल्क पुस्तकें बंट गईं हैं। सीईओ जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि बेसिक और माध्यमिक कक्षाओं की विभिन्न विषयों की 2.45 लाख पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है, लेकिन इस शिक्षा सत्र में नए प्रवेशार्थियों सहित कुछ छात्रों को अभी पुस्तकें नहीं दी जा सकी हैं। बेसिक में 1414, माध्यमिक में 2949 किताबों की मांग की गई है। छह जुलाई को स्कूल खुलने के एक हफ्ते के भीतर पुस्तकें पहुंच जाएंगी। 

बागेश्वर: सभी कक्षाओं में बंट गई किताबें

बागेश्वर जिले में सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से कक्षा बारह तक के विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क पुस्तकें वितरित हो गई हैं। मुख्य शिक्षाधिकारी गजेंद्र सिंह सौन ने बताया कि जिले में करीब 1.30 लाख पुस्तकें कक्षा एक से आठ तक और 1.20 लाख पुस्तकें कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को वितरित की जानी थीं। सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित कर दी गई हैं।

ऊधमसिंह नगर: नहीं मिलीं सभी विषयों की किताबें

रुद्रपुर जिले में कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को पुस्तकें मिल चुकी हैं, लेकिन कुछ विषय ऐसे हैं जिनकी किताबें अभी एससीईआरटी की ओर से नहीं पहुंची हैं। इन किताबों के जुलाई में मिलने की संभावना है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के लिए उपलब्ध सभी किताबों को वितरित कर दिया है जबकि इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान आदि की किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिले में वर्तमान में 785 प्राथमिक व 200 जूनियर हाईस्कूल हैं। 58 इंटर कॉलेज और 66 हाईस्कूल हैं। डीईओ बेसिक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जुलाई तक शेेष विषयों की किताबें मिलते ही उन्हें बांट दिया जाएगा। संवाद

नैनीताल: 95 फीसदी बच्चों को किताबें बांटने का दावा

नैनीताल में शिक्षा विभाग ने नैनीताल जिले में पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के लगभग 95 फीसदी बच्चों को अलग-अलग विषयों की किताबें वितरित कर दी हैं। कुछ विषय की किताबें कम पड़ रही हैं, उनकी पूर्ति के लिए विभागीय अधिकारी अन्य जिलों के संपर्क में हैं। जिला शिक्षा अधिकारी केएस रावत ने बताया कि नैनीताल जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक लगभग 39 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं जबकि नौवीं से 12वीं तक छात्रसंख्या 33 हजार के करीब है। उन्होंने बताया कि अधिकतर बच्चों को किताबें वितरित करा दी हैं। 12वीं कक्षा में अर्थशास्त्र की किताबें कम पड़ गई हैं। इसके लिए डिमांड की गई है। 11वीं कक्षा में अभी दाखिले नहीं हुए हैं। जुलाई में भी कई कक्षाओं में नए पंजीकरण होते हैं। इसे देखते हुए कुछ पुस्तकें अभी स्टॉक में रखी गई हैं।

अल्मोड़ा: स्कूलों में बच्चों को किताबें बांटने का दावा

अल्मोड़ा जिले के सरकारी, सहायता प्राप्त, अशासकीय स्कूलों में कक्षा एक से 12वीं के छात्र-छात्राओं को  समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत मुफ्त किताबें पहुंचा दी गई हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र भट्ट ने बताया कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में छात्र-छात्राओं को पुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया था। जिले के सभी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को पुस्तकें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में किताबें न मिलने की किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। 

पिथौरागढ़: 99 फीसदी किताबें बंटी

पिथौरागढ़ जिले के सभी सरकारी स्कूलों 99 फीसदी किताबें बांटी जा चुकी हैं। डीईओ माध्यमिक हवलदार प्रसाद ने बताया कि जिले में 4.38 लाख किताबें बांटी जानी थी जिसमें प्राथमिक स्तर पर 2.40 और बेसिक की 1.98 लाख किताबें बांटी जानी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्कूल बंद हैं। शिक्षकों को किताबें सीआरसी के माध्यम से बच्चों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बची हुई एक फीसदी किताबें ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी वितरित करने का प्रयास रहेगा। 

हरिद्वार: साढ़े छह हजार बच्चों को नहीं मिली किताबें

हरिद्वार में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगभग एक लाख 55 हजार है, लेकिन जनपद के लगभग साढ़े छह हजार बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी हैं। इसकी वजह से अप्रैल से शुरू हुए सत्र में ये बच्चे पहले ही बिना किताबों के स्कूल गए। वहीं, अब छह जुलाई से खुलने वाले स्कूलों के लिए भी किताबें मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) एसपी सेमवाल ने बताया कि स्कूलवार किताबों की डिमांड समस्त सीआरसी से मांगी गई है। जो आजकल में ही आ जाएगी। किताबों के लिए मांग पत्र शासन को भेज दिया जाएगा।

चमोली में अधिकतर विद्यालयों में बांट दी गईं पाठ्य पुस्तकें

चमोली जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित कर दी गई हैं। निजमुला घाटी के दूरस्थ विद्यालयों के लिए भी पाठ्य पुस्तकें शिक्षा विभाग को प्राप्त हो गई हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अतुल सेमवाल ने बताया कि जिले के कुछ विद्यालयों को छोड़कर सभी स्कूलों में किताबों का वितरण किया जा चुका है। जिले में कक्षा एक से 12वीं तक छात्र संख्या करीब 54923 है। निजमुला घाटी के विद्यालयों में भी जल्द किताबें पहुंचाई जाएंगी। यदि किसी विद्यालय में किसी विषय की किताब कम हो या नहीं पहुंची हो तो विद्यालय खुलने पर विद्यालयों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। संवाद

उत्तरकाशी में 95 फीसदी पुस्तकों का हो चुका है वितरण

सीमांत जनपद उत्तरकाशी में 95 फीसदी विद्यालयों को पाठ्य सामग्री वितरित कर दी गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि जिन विद्यालयों को पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में उन्हें भी पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी। शेष पुस्तकों के लिए प्रकाशकों को आर्डर दे दिए गए हैं। जिले में कक्षा 6 से 12 तक सरकारी विद्यालयो में करीब 28 हजार व कक्षा 1 से 5 तक 7321 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैैं। डीईओ माध्यमिक नरेश शर्मा ने बताया कि माध्यमिक व बेसिक स्तर पर करीब 95 फीसदी विद्यालयों को पाठ्य पुस्तकें वितरित कर दी गई हैं। पाठ्य पुस्तकें कम पड़ने पर टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और हरिद्वार जिलों से पुस्तकें मंगाई गईं थीं। सोमवार को यमुना घाटी के तीनों विकासखंडों नौगांव, पुरोला व मोरी में पुस्तकें भेज दी गई हैं।

कक्षा 8 से 12 तक 9301 किताबें बंटनी शेष

रुद्रप्रयाग में  प्राथमिक से माध्यमिक तक सरकारी विद्यालयों में 95 से 98 फीसदी किताबें वितरित हो चुकी हैं। जिन विषयों में किताबें कम पहुंची हैं, उनकी मांग भेज दी गई है। मुख्य शिक्षाधिकारी वाईएस चौधरी ने बताया कि कक्षा 6 से 12वीं तक जिले में 35 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जिसमें प्राथमिक में 11978 छात्र-छात्राएं हैं। उन्होंने बताया कि माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 6 से 12वीं तक अनुमानित छात्र संख्या के हिसाब से इस वर्ष फरवरी में 168615 किताबों की मांग भेजी गई थी। जबकि 152904 किताबें प्रिंट की गईं हैं, जिसमें 144693 पुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं। इस दौरान पौड़ी जिले से भी विभिन्न विषयों की 14088 पुस्तकें मंगाई गईं। जिले में 9301 किताबों का वितरण शेष रह गया है, जो जुलाई माह में पूरा कर दिया जाएगा।
 

2500 छात्र-छात्राओं को है किताबों का इंतजार

टिहरी जिले के सरकारी स्कूलों में कक्षा नौ से लेकर 12 वीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए गृह विज्ञान, चित्रकला और कृषि विषय की किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई है। कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के लगभग 2500 छात्र-छात्राओं को किसी भी विषय की किताबें नहीं मिल पाई है। मई माह में स्कूलों में आधी-अधूरी पाठ्य सामग्री ही छात्र-छात्राओं को वितरित की गई। जिले में नौ वीं कक्षा से लेकर 12 वीं तक लगभग  50,848 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कक्षा एक से लेकर आठवीं तक लगभग  34,500 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी ललित मोहन चमोला ने बताया कि डिमांड भेजी गई है। 15-20 दिन के अंतर्गत सभी विषयों की किताबें स्कूलों में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। 

जिले में वितरित हुई 5 लाख 90 हजार पुस्तकें

जनपद पौड़ी में कक्षा एक से 12वीं तक 5.91 लाख पुस्तकों का वितरण हो चुका है, जिनमें माध्यमिक में 3.17 लाख और बेसिक में 2.73 लाख पुस्तकें शामिल हैं। जनपद पौड़ी में 1417 प्राथमिक, 255 जूनियर और 302 माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें 61 हजार 450 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। छात्रों का ये आंकड़ा 31 मई 2022 तक का है। माध्यमिक शिक्षा में पुस्तक वितरण के नोडल अधिकारी डा. प्रमोद नौडियाल ने बताया कि जिले में कक्षा 9 से 12वीं तक के अध्ययरत 23,618 छात्रों के लिए 3.93 लाख पुस्तकें मिली थीं, जिनमें 2.81 लाख पुस्तकें पौड़ी जिले में वितरित की गई हैं। शेष किताबें उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और चमोली को भेजी गई हैं। शेष 73030 किताबें हैं जबकि डिमांड 2950 की है। बेसिक शिक्षा के नोडल अधिकारी भारत भूषण परमार ने बताया कि कक्षा एक से 8वीं तक के 37832 छात्रों के लिए 2.91 लाख विभाग को मिली थी, जिनमें से 2.73 लाख पुस्तकें वितरित कर ली गई हैं। शेष 7415 पुस्तकें हैं, जिन्हें नए प्रवेश लेने वाले बच्चों में जुलाई माह में वितरित किया जाएगा।

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सभी स्कूलों में 100 फीसदी वितरित की जा चुकी हैं पुस्तकें

देहरादून जिले के सभी सरकारी स्कूलों में 100 फीसदी पुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं। शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को पुस्तकें वितरित की गई थीं। अन्य कक्षाओं के छात्रों को भी पुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं। जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि इस साल स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने से कुछ विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं पहुंची थी, उन्हें भी किताबें वितरित कर दी गई हैं। 
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