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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Government file petition in ‌Supreme Court for liquor shops

शराब के ठेकों को लेकर उत्तराखंड सरकार ने किया ये काम, हो सकता है बड़ा फायदा

Mon, 01 May 2017 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 01 May 2017 11:42 PM IST
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Government file petition in Supreme Court for liquor shops
Demo Pic - फोटो : demo
नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे शराब की दुकानों को बचाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने अब एक और कदम उठाया है। अगर यह सफल रहा तो केवल ठेके संचालकों को ही नहीं बल्क‌ि सरकार को भी फायदा होगा। 
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शराब की दुकानों को बचाने के ल‌िए प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का हवाला देकर सरकार ने कोर्ट से शराब की दुकानों को हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर शिफ्ट करने संबंधी आदेश में रियायत की गुहार लगाई है।
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इस याचिका पर आठ मई को सुनवाई हो सकती है।  सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2016 को आदेश दिया था कि नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों को शिफ्ट किया जाए। एक  अप्रैल 2017 से शराब की उन दुकानों को लाइसेंस नहीं दिया जाए को हाईवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित हैं।
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हालांकि बाद में कोर्ट ने 31 मार्च को उन नगर निकायों के लिए जिनकी आबादी 20 हजार से कम है के लिए यह दूरी घटाकर 220 मीटर कर दी थी। इस आदेश के बाद प्रदेश में हाईवे किनारे स्थित लगभग 402 दुकानें बंद हो चुकी हैं।

 

भारी व‌िरोध के बाद दायर की याच‌िका

Government file petition in Supreme Court for liquor shops

शराब की दुकानों को रिहायशी इलाके में शिफ्ट करने का भारी विरोध हो रहा है। इस मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रदेश सरकार ने स्टेट हाईवे को डीनोटिफाई कर दिया, लेकिन इसके बाद भी शराब की 35 दुकानें ही बच सकीं। 

आबकारी आयुक्त ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में शासन को प्रस्ताव भेजकर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी। शासन ने इस प्रस्ताव को न्याय विभाग को भेज दिया था। न्याय विभाग ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी थी।

इसके बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है। आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी तो थी, याचिका दायर हुई है नहीं इसकी जानकारी उनको नहीं है। 

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