शराब के ठेकों को लेकर उत्तराखंड सरकार ने किया ये काम, हो सकता है बड़ा फायदा
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शराब की दुकानों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का हवाला देकर सरकार ने कोर्ट से शराब की दुकानों को हाईवे से 500 मीटर से अधिक की दूरी पर शिफ्ट करने संबंधी आदेश में रियायत की गुहार लगाई है।
इस याचिका पर आठ मई को सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2016 को आदेश दिया था कि नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों को शिफ्ट किया जाए। एक अप्रैल 2017 से शराब की उन दुकानों को लाइसेंस नहीं दिया जाए को हाईवे के 500 मीटर के दायरे में स्थित हैं।
हालांकि बाद में कोर्ट ने 31 मार्च को उन नगर निकायों के लिए जिनकी आबादी 20 हजार से कम है के लिए यह दूरी घटाकर 220 मीटर कर दी थी। इस आदेश के बाद प्रदेश में हाईवे किनारे स्थित लगभग 402 दुकानें बंद हो चुकी हैं।
भारी विरोध के बाद दायर की याचिका
शराब की दुकानों को रिहायशी इलाके में शिफ्ट करने का भारी विरोध हो रहा है। इस मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रदेश सरकार ने स्टेट हाईवे को डीनोटिफाई कर दिया, लेकिन इसके बाद भी शराब की 35 दुकानें ही बच सकीं।
आबकारी आयुक्त ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में शासन को प्रस्ताव भेजकर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी। शासन ने इस प्रस्ताव को न्याय विभाग को भेज दिया था। न्याय विभाग ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी थी।
इसके बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है। आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी तो थी, याचिका दायर हुई है नहीं इसकी जानकारी उनको नहीं है।