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घर है न ठिकाना, बस चलते जाना...
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 25 Jan 2016 04:03 PM IST
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मुखिया ने अपने एक करीबी को एक महकमे में ऊंचे ओहदे पर तो बैठा दिया, लेकिन उनकी कुर्सी कहां सजेगी, इसे लेकर संशय है। एक ऊंची वर्दी वाली पोस्ट से रिटायर यह जनाब गोपन से जारी ताजपोशी का पत्र लेकर मारे मारे घूम रहे हैं।
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मामला मुखिया के दरबार में जा पहुंचा। मुखिया ने संबंधित विभाग के हाकिम को फोन कर उनके लिए दफ्तर, गाड़ी और पीए तुरंत देने को कहा। अब भला मुखिया का फरमान सुन हाकिम ने अपने मातहतो को अमल की हिदायत दी, लेकिन मामला बजट पर आकर अटका और फिर मुखिया के दरबार पहुंच गया।
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मुखिया तो मुखिया हैं, अब उन्होंने हाकिम के मार्फत महकमे के एक निगम को फरमान सुनाया कि तुरंत अपना खजाना खाली कर चहेते की के लिए व्यवस्था बनाओ। 6 माह से नियुक्ति की चिट्ठी लेकर घूम रहे जनाब को बैठने का कोई ठिकाना नहीं मिल रहा।
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