फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   girl saving lives and forest also

यहां दमखम से लेकर दिमाग तक बेटियों ने लिखी नई इबारत

Sun, 09 Oct 2016 05:17 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 09 Oct 2016 05:17 PM IST
विज्ञापन
girl saving lives and forest also
- फोटो : अमर उजाला

बेटियां अब जिंदगियों को बचाने में नहीं बल्कि जंगल बचाने में भी आगे आ रही हैं। दमखम से लेकर दिमाग तक की कड़ी परीक्षा के रेंजर्स कोर्स में ही पिछले तीन साल से बेटियां ही चैंपियन बनती आ रही हैं। यही हाल एमबीबीएस कोर्स का है। बेटियों की प्रतिभा के इनके शिक्षक भी कायल हो रहे हैं।

विज्ञापन


फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में देश के अलग-अलग राज्यों से प्रशिक्षु पहुंचते हैं। 18 महीने का रेंजर कोर्स में केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक दमखम का कड़ी परीक्षा होती है। फायरिंग से लेकर पढ़ाई के अलग-अलग कोर्स में अव्वल आने पर ही ओवर आल चैंपियन जैसा खिताब मिलता है।
विज्ञापन


रेंजर्स कोर्स में बेटियां अब आगे आ रही हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक रेजर्स कोर्स में कुल पदों के सापेक्ष छह गुना तक बेटियां शामिल होने के लिए पहुंच रही हैं। पिछले तीन साल के परिणाम पर नजर डाले तो साफ हो रहा है कि बेटियों का यहां प्रदर्शन भी अव्वल ही है। पिछले तीन 2011-12 में संगीता मुधकर ऑवरऑल चैंपियन बनीं। 2013-2014 में विधि सिरोलिया ने सबको पीछे छोड़ा। 2015-16 के बैच में रूमन अब्दुला ने टॉप किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

girl saving lives and forest also

मेडिकल कालेज हल्द्वानी में 2004 से एमबीबीएस का कोर्स प्रारंभ हुआ था। इसके बाद से 2010 तक कई पांच साल के बैच निकल चुके हैं। इसमें एक 2010 को छोड़ दें, तो हर साल बेटियां ही एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई के पहले पायदान पर रही।

2004 में डा. पारूल कोदान, 2005 में डा. गरिमा गोयल नंबर वन पर रही। 2006 में डा. स्वाति मिश्रा और अगले साल ही दो बेटियां संयुक्त रूप से डा. अंकिता बेदवाल और डा. दिशा तिवारी सर्वश्रेष्ठ चुनी गईं। 2008 में डा. निधि मंगला, 2009 में डा. श्रुति शर्मा ने टॉप किया।

वन विभाग का काम चुनौतीपूर्ण है। जहां दुर्गम और विषम परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। अब इस कोर्स करने में भी बेटियां आगे रही हैं। दक्षता, कुशलता और प्रतिभा के दम पर बेटियों ने लगातार तीन साल सेरेंजर कोर्स में टॉप किया है। 
- डा. कपिल जोशी, एफटीआई निदेशक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed