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'आपदा के दौरान बाप-बेटे का नहीं था': जनरल चैत

Mon, 03 Mar 2014 09:41 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Mar 2014 09:41 AM IST
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general anil chait said about uttarakhand flood

पिछले साल जून में केदार घाटी की आपदा ने मानव व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव के साथ ही शून्य होती संवेदनशीलता का अहसास करा दिया। यह कहना है लेफ्टिनेंट जनरल चैत का।

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चैत ने आपदा के दौरान का आंखों देखा हाल बताते हुए कहा कि आपदा के दौरान बाप-बेटे का नहीं था। जिगर के टुकड़ों को बचाने की ममता लोगों में मर चुकी थी।

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ऐसे में अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की जान बचाने की सेना की जद्दोजहद इंसानियत की नई दास्तान बन गई। इस त्रासदी में सेना के हौसले और जज्बे को हमें सलाम करना चाहिए।

आपदा में मानव व्यवहार एकदम अप्रत्याशित था

general anil chait said about uttarakhand flood

रविवार को रोटरी इंटरनेशनल के कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल चैत ने कहा कि आपदा से गुजर रहे लोगों के मनोविज्ञान को समझने और अनुभव करने का मौका उन्हें उत्तराखंड आपदा के दौरान मिला।

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इस आपदा में मानव व्यवहार एकदम अप्रत्याशित था। बदरीनाथ के पास ही एक परिवार ने अपने नौ साल के बेटे को इसलिए छोड़ दिया कि वह चल नहीं सकता था। वह विकलांग था।

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सेना को जब यह बच्चा मिला तो पहले समझ में ही नहीं आया कि क्या किया जाए। सेना ने ही कुछ दिन तक बच्चे की देखभाल की और पता लगाने की कोशिश की उसके मां बाप हैं कहां।

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इस बीच हालात सामान्य हुए तो सेना को बच्चे का पिता ठीक उसी जगह पर मिला, जहां से वह बेटे को छोड़कर गया था। बाद में विकलांग बच्चे को उसके पिता को सौंप दिया गया।

बदहवास लोगों को बस अपनी ही परवाह थी

general anil chait said about uttarakhand flood

लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि आपदा के दौरान बदहवास लोगों को अपनी ही परवाह थी। बुरी तरह घबराए लोगों को न सामान की चिंता थी न परिजनों की।

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ऐसे में सेना को बचाव अभियान में प्राथमिकता तय करनी पड़ी। यह जरूरी भी था। जैसे-जैसे हालात नियंत्रण में आते गए लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आता गया।

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पहले जिसे केवल अपनी जान की चिंता थी बाद में वे परिजनों और संगी साथियों के लिए व्याकुल दिखे। पांच दिन बाद तो फंसे हुए लोग सामान भी साथ में ले जाने पर अड़ गए।

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चैत ने बताया कि आपदा का प्रभाव इतना व्यापक था कि सेना के लिए बचाव का काम बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में सेना ने संयम और साहस के साथ अपना अभियान जारी रखा।

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आपदा की इस घड़ी में फौज ने जो कर दिखाया उसके लिए हमें अपनी सेना पर गर्व करना चाहिए। इससे सेना का मनोबल हमेशा ऊंचा रहेगा।

चैत ने पैदल मार्ग से लोगों को निकाला

general anil chait said about uttarakhand flood

16-17 जून की आपदा के दौरान सड़के टूट जाने पर करीब दस हजार यात्री बदरीनाथ में ही अटक गए थे।

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मौसम का बुरा हाल था और ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित निकाल ले जाने के लिए सेना हेलीकाप्टर का इस्तेमाल भी ढंग से नहीं कर पा रही थी।

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तब बचाव कार्य की कमान संभाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत ने बदरीनाथ से तीन हजार से ज्यादा लोगों को पैदल मार्ग से सुरक्षित निकाला था।

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चैत इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे और लोगों के साथ आगे-आगे खुद ही चलकर करीब 40 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता तय किया था।

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