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उत्तराखंड: पूर्व मंत्री के आवास पर पढ़ाई जाएंगी गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी बोलियां
Tue, 01 Jan 2019 02:39 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 01 Jan 2019 02:39 PM IST
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मंत्री प्रसाद नैथानी
- फोटो : file photo
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पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने अपने आवास पर बच्चों को गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा पढ़ाने का कार्यक्रम शुरू किया है।
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उन्होंने कहा कि वह रोजाना शाम को 4 से 5 बजे तक अपने आवास पर गढ़वाली और कुमाऊंनी बोली पढ़ाई जाएगी। दून मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. एमके पंत कुमाऊंनी और कारोबारी विनोद चौहान जौनसारी पढ़ाएंगे।
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मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश की स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा को जोड़ने की पहल की थी। हालांकि आचार संहिता लगने के कारण वह इस अभियान को आगे नहीं बढ़ा पाए। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से वह सोच रहे थे कि सरकार इस दिशा में कोई पहल करेगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिसके कारण उन्हें खुद गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा को संरक्षण देने के लिए आगे आना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी बोली को शामिल कराने के लिए प्रदेश स्तर पर इस तरह की कक्षाओं के आयोजन की योजना बना रहे हैं।