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वापस अपने गांव ही नहीं जाना चाहते लोग

Sun, 25 Aug 2013 12:57 PM IST
अमर उजाला, सुल्तानपुर
अमर उजाला, सुल्तानपुर Updated Sun, 25 Aug 2013 12:57 PM IST
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Gangdaspur people left the village

हरिद्वार जिले के खादर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव गंगदासपुर से पानी उतर चुका है। लेकिन राशन की किल्लत के कारण ग्रामीण वहां नहीं रहना चाहते। शनिवार को भी गांव के कई लोग अपना सामान समेटकर पथरी वन क्षेत्र में आ गए।

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बताया जा रहा है कि गांव में अब केवल 10-15 लोग ही रह गए हैं। गांव छोड़कर आए ग्रामीणों का कहना है कि वहां रहेंगे तो भूखे मर जाएंगे। पथरी में हरिद्वार की धार्मिक संस्था कम से कम भोजन तो उपलब्ध करा रही है।
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गंगदासपुर गांव दो माह से अधिक समय तक बाढ़ के पानी से घिरा रहा। अभी हाल ही में यहां से पानी उतरा है। ऐसा नहीं है कि यहां के ग्रामीणों के लिए बाढ़ कोई नई बात हो, लेकिन इस बार जैसे हालात कभी पैदा नहीं हुए।
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280 परिवारों ने गांव छोड़ा
इस बार बाढ़ ग्रामीणों का सबकुछ तबाह कर गई। गांव में अपने और पशुओं के भूखे मरने की नौबत खड़ी होने के बाद ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर हो गए थे।

बीते रविवार को गांव के 280 परिवारों ने गांव छोड़कर पथरी के जंगल में डेरा डाल दिया था। वन विभाग की तमाम धमकियों के बाद भी ग्रामीणों ने जंगल नहीं छोड़ा।

गांव जाने के लिए तैयार नहीं
ग्रामीण फिलहाल गांव जाने के लिए तैयार नहीं हैं। अभी तक जंगल में आने वाले परिवारों के कुछ सदस्य गांव में रह रहे थे। शनिवार को काफी संख्या में ऐसे ग्रामीण भी सामान समेटकर ट्रैक्टर ट्रालियों से पथरी वन क्षेत्र में आ गए।

जानकारी के अनुसार, अब अधिकांश घरों पर ताले लटक गए हैं। ग्रामीण मिलकराम, किशन सिंह, सतीश कुमार का कहना है कि अब गांव में चंद लोग रह गए हैं। सभी घरों में ताले लटके हैं।

 
खेतों से पानी उतरने के बाद सोचेंगे लौटने के बारे में
पथरी के जंगल में ग्रामीणों को प्रशासन की तरफ से कुछ नहीं मिला, लेकिन शांतिकुंज की तरफ दो समय का भोजन दिया जा रहा है।

शांतिकुंज के सेवक हर रोज भोजन लेकर यहां पहुंचते हैं। यहां ग्रामीणों को लाइन में बैठाकर भोजन करवाया जा रहा है। ग्रामीण प्रेमचंद, सुभाष, जगदीश का कहना है कि शासन और प्रशासन ने तो उन्हें गांव में मरने के लिए छोड़ दिया था।

पथरी में ग्रामीणों को खाना मिल रहा है और जानवर जंगलों में चुग रहे हैं। गांव में खेतों से भी पानी उतर जाएगा तो उसके बाद ही लौटने के बारे में सोचेंगे।

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